कनावनी क्षेत्र की झुग्गियों में लगी आग की घटना किसी त्रासदी के कम नहीं है। कितने लोगों के घर, उनके सपने, उनकी उम्मीदें, भविष्य की योजनाएं इस आगजनी में जलकर राख हो गए। राख के ढेर के बीच खड़े लोगों की निराश आंखों से बह रही अश्रुधारा से उनके दर्द का समंदर बाहर आ रहा है। अब इनके पास ना छत रही ना कोई जमा पूंजी। उन तमाम लोगों के दर्द पर मरहम प्रशासन और मदद के लिए उठे हाथों ने लगाया। बिना किसी संशय के यह कहा जा सकता है कि अग्निशमन विभाग का कार्य सराहनीय रहा। उसके बाद जिला प्रशासन ने सभी पीडि़तों के रहने की अस्थाई व्यवस्था की। आर्थिक सहायता के प्रयास की पहल जिलाधिकारी रविन्द्र मांदड द्वारा की गई। आसपास के लोगों ने भी सहायता के लिए दिल खोल दिए। किसी ने बच्चों को दूध, बिस्कुट दिए, किसी ने भोजन की व्यवस्था कराई, कोई कपड़े देकर गया। प्रशासन ने करीब एक हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था में देर नहीं लगाई। आगजनी का शिकार हुए लोगों के जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए जिससे जो बना वो उसने किया। ना कोई अपील थी, ना कोई आह्वïान, लोग खुद से सहायता के लिए आगे आए। यही सबसे बड़ी बात है। यही देखकर तो सुकून मिलता है चलो अभी लोगों के अंदर मानवता जीवित है।
परेशानी में फंसे लोगों की सहायता कर देने की परंपरा अभी समाज में जिंदा है। गर्मी बढ़ रही है, कुछ दिनों में यह चरम पर पहुंच जाएगी। ऐसे में बहुत अधिक सतर्क और सावधान रहने की आवश्यकता है। क्योंकि गर्मी में आग लगने की घटनाएं बहुत बढ़ जाती हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा कुछ ना करें जिससे आग लगने की आशंका बढ़ जाए। आग से बचाव के सभी उपाय तैयार रखें, अग्निशमन विभाग एवं प्रशासन की एडवाइजरी का शत-प्रतिशत पालन करें। मैं व्यक्तिगत रूप से उन सभी लोगों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने मुश्किल समय में पीडि़तों की सहायता के लिए हाथ बढ़ाया।