विधानसभा चुनाव-२०२७
सरकारी कुर्सी पर रहकर कार्यकर्ता के रूप में काम करने वाले अधिकारी भी चुनाव लडऩे की तैयारी में हैं। दरअसल, दो दशकों से जो सरकारें रही हैं उनमें जो अफसर तैनात रहे हैं उन्होंने अपनी कुर्सी दांव पर लगाकर सरकार के लिए काम किया है। हालांकि पहले भी कुछ ऐसे अधिकारी रहे हैं जो सेवा निवृत्त होने के बाद उन्होंने कई संगठन बनाकर अपने आप को बिजी रखा है लेकिन ऐसे अधिकारियों की संख्या नाम मात्र थी। लेकिन दो दशकों से जिनकी सरकारें रहीं उनमें जो अफसर तैनात रहे खासकर बसपा में उन्होंने पूरी तरह से एक कार्यकर्ता के रूप में काम किया। वर्तमान में भी साढ़े नौ साल से कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आयी जिसमें सरकारी कुर्सी पर बैठकर अफसरों ने पार्टी कार्यकर्ता के रूप में काम किया। कुछ अधिकारियों ने तो समय से पहले वीआरएस लेकर खादी पहन ली। तीसरी आंख ने देखा कि 2022 में भी कुछ अफसर खादी पहनने के लिए जोर आजमाइश कर रहे थे लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। अब 2027 के विधानसभा चुनाव में फिर कुछ अफसर खादी पहनने की तैयारी कर रहे हैं। गाजियाबाद एवं गौतमबुद्घनगर तत्कालीन जिलाधिकारी टिकट की दौड़ में हैं। एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी जहां चुनाव लडऩे का मन बना रहे हैं वहीं एक पीपीएस अधिकारी भी चाहते हैं कि वो खाकी के बदले खादी पहन ले। दरअसल, खादी पहनना मजबूरी भी है क्योंकि यदि सरकार बदली तो फिर सामना करना आसान नहीं होगा। क्योंकि कुछ ऐसी घटनाएं साढ़े नौ साल में हुई है जिन्होंने खाकी पहनने के बाद भी एक तरफा खादी का साथ दिया। उसका सही संदेश नहीं गया। दो दशकों में सरकारी अफसरों में यह बदलाव है। जबकि अधिकारियों को चाहिए कि वो केवल संविधान के रूप में काम करें और सर्विस ज्वाइन करते समय जो संकल्प उन्होंने लिया उस पर ही काम करते तो शायद ऐसी नौबत नहीं आती।
क्योंकि आईएएस और आईपीएस एक ऐसे पद हैं जो आसानी से नसीब नहीं होते और इनका रूतबा बहुत ही बुलंद है और ये पद भी बहुत ही सम्मानीय हैं। आईएएस और आईपीएस के लिए तो कहावत है कि ये एक तरह से सरकारी दामाद होते हैं। हालांकि आज भी अधिकतर लोग इन पदों का पूरी तरह से सम्मान रख रहे हैं और लोग भी इन पदों पर आसीन लोगों का पूरा सम्मान करते हैं। लेकिन कुछ अफसरों की वजह से जरूर कहीं ना कहीं एक संदेश जाता है कि ये पार्टी वर्कर के रूप में काम कर रहे हैं। हो सकता है कुछ मजबूरी हो। यही कारण है कि अब इस बार कई सेवानिवृत्त अफसर भी टिकट की लाइन में हैं। जय हिंद