गाजियाबाद (युग करवट)। इस नवरात्रि में सप्तमी तिथि की वृद्घि हो रही है। ऐसे में 17 अक्टूबर को सूर्य उदय से अगले दिन 8.28 मिनट तक सप्तमी रहेगी। इस कारण 17 अक्टूबर को पूर्ण सप्तमी है। उसदिन सप्तमी का व्रत रखा जाएगा। रविवार को सूर्योदय के समय सप्तमी है और करीब 8.29 बजे अष्टïमी आरंभ होगी, सोमवार को सूर्योदय के समय अष्टïमी विद्यमान है और करीब 10.51 बजे के बाद नवमी तिथि आ जाएगी। पंडित शिवशंकर शर्मा ने बताया कि धर्मसिंधु के महाष्टमी निर्णय में स्पष्ट है कि आश्विन शुक्ल अष्टमी सूर्योदय के समय एक घटिका भी हो, तो नवमी से युक्त होने पर भी उसे ग्रहण किया जाता है उस दिन सूर्योदय पर अष्टमी न हो या एक घटिका से कम हो, तब पूर्व दिन की सप्तमी-विद्धि अष्टमी ग्रहण करने का विधान दिया गया है। इसलिए धर्मसिंधु के उपर्युक्त नियम के अनुसार महाष्टमी-व्रत और कंजक पूजन सोमवार 19 अक्टूबर को ही करना चाहिए क्योंकि उस दिन सूर्योदय के समय अष्टमी है। रविवार को अष्टमी तिथि लग जाने मात्र से रविवार को सप्तमी तिथि वृद्धि के कारण व्रत करना अनिवार्य नहीं होता। उस दिन 18 अक्टूबर को मां भगवती की सामान्य पूजा, अपनी परंपरा के अनुसार सप्तशती का पाठ अथवा आरती कर सकते हैं । सामान्य भोजन करेंगे और 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी व्रत और को कंजक पूजन किया जाएगा।