भाजपा पश्चिम बंगाल चुनाव जीतना चाहती थी, सो जीत गई। नौ मई को वहां भाजपा का मुख्यमंत्री शपथ भी ले लेगा। पश्चिम बंगाल में मिली जीत का जश्न गाजियाबाद में भी जमकर मनाया गया। जश्न के दौरान महसूस हुआ कि एक सवाल ऐसा है जो अभी भी लोगों के दिमाग से निकल नहीं पाया है। हालांकि इसके लिए नगर आयुक्त और मेयर ने प्रयास भी कर लिए, मगर जनता है कि मानती ही नहीं। सवाल है कि क्या गाजियाबाद में नगर निगम के हाउस टैक्स का मामला निपट चुका है? अब इसे आप नगर निगम के नजरिए से देखेंगे तो पाएंगे कि मामले का समाधान हो चुका है। खुद मेयर और नगर आयुक्त ने पार्षदों के साथ मिलकर प्रेस वार्ता के जरिए टैक्स दर कम करने की बात कही थी। मगर पूर्व पार्षद राजेन्द्र त्यागी और व्यापारी नेता अवधेश शर्मा की बात पर यकीन करें तो समझ में आता है कि विवाद भी जारी है। इस पक्ष का कहना है कि मेयर ने वादा किया था कि नगर निगम के हाउस टैक्स की दरों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं होगी। शहर की जनता पुरानी दरों से ही टैक्स जमा कर पाएगी। मगर ऐसा तो नहीं हुआ। कम ही सही टैक्स तो बढ़ाया गया है। अब पुरानी दरों पर तो टैक्स जमा नहीं किया जाएगा। बात केवल पूर्व पार्षद राजेन्द्र त्यागी या व्यापारी नेता अवधेश शर्मा तक सीमित नहीं है। सामान्य नागरिक भी जानना चाहता है कि नगर निगम ने किस तरह से टैक्स की दरें बढ़ाकर लागू कर दी हैं। गाजियाबाद में भाजपा के कई स्थानों पर जश्न के दौरान लोगों ने यह सवाल पूछा है। जिसके मायने हैं कि नगर निगम के हाउस टैक्स का मामला जनता के दिमाग में है। यह होना भाजपा के लिहाज से सही नहीं माना जा सकता। लोगों के मन में सवाल जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी है। लोग अभी भी जानना चाहते हैं कि आखिर इतने संवेदनशील मामले पर सांसद और विधायकों ने सरकार से क्यों बात नहीं की थी। इस बात को तो मान ही लीजिए कि आगामी चुनाव में गाजियाबाद नगर निगम विपक्ष के लिए एक अहम मुद्दा रहने वाला है।