आपातकाल बनाम लोकतंत्र की आत्मा
देश में जब आपातकाल की घोषणा हुई तब मेरी उम्र बामुश्किल 14 बरस थी मगर उसका अच्छा बुरा असर मेरी उम्र के किशोरों पर भी पड़ा था। शहर की पॉश मानी जाने वाली हमारी कॉलोनी कविनगर तब बसनी शुरू ही हुई थी। छोटी से छोटी चीज के लिए भी शहर [...]