सहमति से समाधान पर बने अब बात
भारत में अदालती कार्रवाई के बारे में सभी जानते हैं। वर्षों से एक ही समस्या सुनते आए हैं कि अदालतों में जजों की संख्या सीमित है और मुकदमों की संख्या बहुत अधिक। साल दर साल मुकदमों की संख्या बढ़ती चली गई। अन्तोगत्वा स्थिति यह हुई कि पहले फास्ट ट्रैक और [...]