चर्चा का विषय बनी समाजवादी पार्टी की नई कार्यकारिणी
सुरेश चौधरी
नोएडा (युग करवट)। गौतमबुद्ध नगर समाजवादी पार्टी द्वारा 2 दिन पूर्व घोषित की गई नई कार्यकारिणी के बाद तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सपा गौतमबुद्ध नगर जिला अध्यक्ष के क्षेत्र में दादरी और जेवर विधानसभा सीटें आती हैं। दादरी विधानसभा सीट पर एसआईआर के बाद करीब 6 लाख 5 हजार और जेवर विधानसभा सीट पर 3 लाख 12 हजार मतदाता है। अभी कुछ और लोगों के नाम जुडऩे की संभावना है। दोनों विधानसभा सीटें पहले ग्रामीण परिवेश की मानी जाती थी, लेकिन जिस तरह से इस क्षेत्र का शहरीकरण हुआ है, दादरी विधानसभा सीट पूरी तरह से शहरी डोमिनेटेड हो चुकी है, जबकि जेवर विधानसभा सीट पर भी शहरी मतदाता 40 प्रतिशत से ज्यादा हो गए हैं। जिस तरह से जेवर क्षेत्र में शहरीकरण हो रहा है उससे आगामी वर्षों में जेवर विधानसभा सीट पर भी शहरी मतदाताओं की संख्या ज्यादा होने की चर्चा है।
राजनीति के जानकारों का कहना है कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी है। इस पार्टी के नेता आगामी विधानसभा चुनाव में अपने जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन गौतम बुद्ध नगर में जिस तरह से सपा के नेता काम कर रहे हैं, उससे उनके बड़े नेताओं के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। सपा की जिला कार्यकारिणी की नव घोषित कमेटी में करीब 40 प्रतिशत गुर्जर बिरादरी, 30 फीसद मुस्लिम समुदाय और 30 फीसद में अन्य बिरादरी के लोग शामिल किए गए हैं। कार्यकारिणी की घोषणा के बाद लोगों में चर्चा है कि जहां पर दादरी विधानसभा सीट पर 70 प्रतिशत मतदाता हो गए हैं, वहां पर नई कमेटी में शहरी पूर्वांचल/बिहारी, पंजाबी बिरादरी,वैश्य, ब्राह्मण बिरादरी के लोगों को तवज्जो नहीं दी गई है। इस विधानसभा सीट पर वैश्य, ब्राह्मण वर्ग के भी काफी मतदाता हैं, लेकिन उनको कमेटी में ना के बराबर जगह दी गई है। राजनीति के जानकारों के अनुसार जेवर विधानसभा सीट का भी कमोवेश यही हाल है। इस क्षेत्र में भी पूर्वांचल/बिहारी, पंजाबी, वैश्य, ब्राह्मण, कायस्थ और शहरी मतदाताओं की संख्या 40 प्रतिशत है, लेकिन इन लोगों को भी वहां पर तवज्जो नहीं दी गई है। ज्यादातर ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोग ही कमेटी में शामिल किए गए हैं। कमेटी में शामिल ग्रामीण पृष्ठभूमि के कुछ लोग शहरों में रहते जरूर है लेकिन उन्होंने शहरों की भी आबोहवा काफी खराब कर रखी है। शहरी लोगों के साथ आए दिन उनका विवाद रहता है। इस तरह के लोग सपा के वोट बैंक बढ़ाने के बजाय पार्टी को नुकसान ही कर सकते हैं। समाजवादी पार्टी के जानकारों का कहना है कि जिस तरह से नई कमेटी में गुर्जर बिरादरी के लोगों को विशेष तव्वजो दी गई है, उससे आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के जनाधार बढऩे की बजाए घट सकता है। मालूम हो इससे पूर्व भी समाजवादी पार्टी ने दादरी विधानसभा सीट से राजकुमार भाटी, नोएडा विधानसभा सीट से सुनील चौधरी और जेवर विधानसभा सीट से यतेन्दर नागर को चुनाव लड़वाया था। तीनों गुर्जर बिरादरी से है, लेकिन भाजपा ने एक तरफा जीत हासिल कर कई प्रत्याशियों की जमानत भी जब्त करवा दी थी। राजनीति के जानकारों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो आगामी विधानसभा चुनाव में भी पिछले चुनाव के परिणाम की पुनरावृत्ति हो सकती है। सपा के लोगों का कहना कि अगर नई कमेटी में शहरी लोगों को तवज्जो दी जाती तो रिजल्ट कुछ और हो सकता है। क्योंकि यहां के सोसाइटी और सेक्टर में समाजवादी पार्टी की पकड़ काफी कमजोर है। चुनाव में कई बार सपा का यहां पर बस्ता भी नहीं लगता, जबकि कई सोसाइटियां ऐसी हैं जो 20 गांवों पर भारी पड़ती है।