महापौर इस मामले में करें विचार, दिल्ली सरकार देती है समितियों को ग्रांट
नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। नगर निगम के कार्यकारिणी उपाध्यक्ष एवं पार्षद प्रवीण चौधरी का कहना कि जिले में रामलीला आयोजन के लिए रामलीला समितियों से किराया ना लिया जाए और अगर किराया लिया भी जाए तो एक संाकेतिक किराया ही लिया जाए जिससे समितियों पर कोई आर्थिक बोझ न पड़े। रामलीला का आयोजन समितियां चंदे से कराती हैं, ऐसे में यह किराया समितियों पर बेवजह का पड़ता है।
नगर निगम उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी का कहना है कि जिले में छोटी-बड़ी मिलाकर करीब दो दर्जन क्षेत्रों में रामलीलाओं का आयोजन होता है जो नगर निगम के अधीन रामलीला मैदानों में होता है। इन मैदानों में नगर निगम द्वारा रामलीला आयोजन को जो करीब 15 दिन चलती हैं, किराया लिया जाता है। जो करीब दो से ढाई लाख रूपए बैठता है। जबकि समितियों को यह खाली मैदान ही मिलते हैं, खुद समितियां किराया देने के बाद इन ग्राउंड को ठीक कराती हैं, शौचालय आदि का इंतजाम कराती हैं। ऐसे में चंदे से चलने वाली इन समितियों पर यह बेवजह का बोझ है। कार्यकारिणी उपाध्यक्ष ने कहा कि शहर की महापौर को चाहिए कि वह समितियों से एकमुश्त सांकेतिक रूप से आठ से दस हजार रूपए लें या फिर उसे भी निशुल्क कर दिया जाए। क्योंकि दिल्ली सरकार रामलीला आयोजन के लिए ग्रांट देती हैं, कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को योगी सरकार प्रति व्यक्ति डेढ़ लाख रूपया देती है। ऐसे में शहर में होने वाली रामलीला समितियों से मैदान के लिए किराया लेने का औचित्य नहीं है। हम सब राम भक्त और उनमें आस्था है। रामलीला मंचन भी धार्मिक आयोजन हैं जिससे हजारों लोगों की आस्था जुड़ी होती है, हजारों लोग रामलीला मंचन देखने आते हैं। ऐसे में किसी धार्मिक आयोजन के लिए किराया लेना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि महापौर चाहे तो किराया कम कर सकती हैं। बोर्ड बैठक में इस मुद्दे को उठाए जाने पर उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने कहा कि कार्यकारिणी की बैठक काफी लम्बे समय के अंतराल पर होती है, ऐसे में कैसे इस तरह के प्रस्ताव को उठाया जाए, अगले महीने शहर में रामलीला का आयोजन शुरू हो जाएगा, इसके लिए बुकिंग भी शुरू होने लगी है। इसलिए प्रस्ताव रखने के लिए अब बोर्ड या कार्यकारिणी बैठक का इंतजार नहीं किया जा सकता है। वह इस मामले में रामलीला समितियों के साथ हैं और चाहते हैं कि निगम स्तर से इस मामले में सार्थक निर्णय लिए जाएं।