कितना फर्क है झारखंड के आंदोलन
दिल्ली में जो पेपर लीक को लेकर आंदोलन हुआ और जिस तरह की भाषा का प्रयोग हुआ वो सभी के सामने है। हालांकि आंदोलन में सीजेपी को सफलता मिली और मोदी सरकार में पहली बार किसी मंत्री का त्याग पत्र हुआ और छात्रों के आगे सरकार को झुकना पड़ा। हालांकि इसके परिणाम आगे जरूर दिखाई देंगे। आज सभी जेन जी से संवाद की बात कर रहे हैं। वैसे आंदोलन में खूब राजनीति हुई और आज तक संसद नहीं चल रही है। भले ही दिल्ली में सफलता मिली हो लेकिन आंदोलन जिस तरह की भाषा का प्रयोग हुआ रील बनाई गई, गालियां बकी गई उससे आंदोलन का स्वरूप जरूर बदला और कोई भी सभ्य समाज ऐसी भाषा को स्वीकार नहीं कर सकता। आंदोलन का अधिकार सभी को है लेकिन भाषा का इस्तेमाल भी सही होना चाहिए। इस आंदोलन के बाद युवाओं के प्रति सभी की सोच बदली है और सत्ता में बैठे लोग भी घबराये हुए है। पेपर लीक को लेकर झारखंड में जबरदस्त आंदोलन चल रहा है लेकिन दिल्ली और झांरखंड के आंदोलन में बहुत फर्क है। वहां पर कोई भी अश्लीलता से भरी भाषा का प्रयोग नहीं किया गया है, किसी को कोई गाली नहीं दी गई, हजारों की संख्या में छात्र मौजूद हैं, कहीं कोई भी हिंसा नहीं हुई, इतना ही नहीं जब पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो छात्रों ने इसके जवाब में पुलिस को कोई गाली नहीं बकी बल्कि लाठीचार्ज के जवाब में राष्टï्रगान शुरू कर दिया। वास्तव में इसे कहते हैं आंदोलन। आप अपनी बात कहिए लेकिन एक दायरे में कहिए, अपनी आवाज उठाइए लेकिन एक दायरे में उठाइए। जाहिर है जरूर आवाज सुनी जाएगी। वहां पर कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं हुआ। हालांकि अब कुछ संगठन पहुंचे हैं। बहरहाल, दिल्ली में छात्रों की आवाज उठाने वाले सीजेपी के एक नेता भी इस आंदोलन का हिस्सा नहीं बने। किसी को बुखार आ गया, कोई थक गया था और ना जाने क्या-क्या बहाने किये जाने लगे। दरअसल, इससे एक बात जरूर साफ हुई कि दिल्ली में जिन लोगों ने आंदोलन किया वो केवल छात्रों की लड़ाई नहीं लड़ रहे थे बल्कि भाजपा के खिलाफ उनकी लड़ाई थी। यदि छात्रों के लड़ते तो फिर झारखंड भी जाना चाहिए। क्योंकि वहां पर भाजपा की सरकार नहीं है इसलिए आंदोलन से दूर रहे। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आंदोलन भी सरकारों को देखकर हो रहा है।
जय हिंद