विधानसभा चुनाव-२०२७
भगवान श्री राम मंदिर के चढ़ावा चोरी को लेकर ऐसे लोग बयानबाजी कर रहे हैं जिन्होंने अयोध्या जाकर आज तक भगवान राम के दर्शन तक नहीं किये। आज स्थिति ये है कि उनकी हर प्रेस कॉन्फ्रेेंस में भगवान प्रभु श्रीराम से शुरू होती है और उस पर ही खत्म हो जाती है। लेकिन ये सब अपना अतीत भूल जाते हैं। अभी सबसे ज्यादा जिस पार्टी मंदिर चढ़ावे को लेकर आस्था की बात की है भाजपा को घेरा है, विश्व हिंदू परिषद आरएसएस को घेरा है उन्हीं की पार्टी के एक नेता की वीडियो वायरल हो रही है जिसको सुनने के बाद आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह की भाषा वो वीडियो में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन नेता जी का साफ-साफ कहना है कि कारसेवकों पर गोली चलाने का उन्हें कोई मलाल नहीं है। इतना ही नहीं वो धर्म विशेष के धार्मिक स्थल को लेकर वो कहते हैं कि उसकी सुरक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। आज लोग इस बात का आरोप लगाते हैं कि भाजपा नफरत की राजनीति करती है। ठीक है भाजपा के कुछ नेता इस तरह की राजनीति करते हैं लेकिन अगर आप तीन दशक पहले की राजनीति पर नजर डालें तो नफरत की राजनीति तो तीन दशक पहले ही एक दल से शुरू कर दी थी। यही कारण है कि उस दल के प्रमुख को कई नामों से पुकारा जाने लगा था। ऐसा नहीं है कि नफरत की राजनीति आज ही हो रही हो इसके बीज तो तीन दशक पहले ही बोए जाने लगे थे और आज दूसरे दल को मौका मिला है तो उसके भी कुछ नेता उसी रास्ते पर चल रहे हैं लेकिन इसके लिए भाजपा कतई जिम्मेदार नहीं है। क्योंकि नफरत और दूरी की राजनीति 70 साल से चल रही है। हमेशा भाजपा के नाम पर लोगों को दूर किया जाता रहा है और आज जब लोग समझदार हो गये तो फिर नफरत की भाषा के नाम पर उन्हें बहकाया जा रहा है। देश के लोगों को ऐसी राजनीति से दूर रहना चाहिए। जाति विशेष के धार्मिक स्थल की सुरक्षा जरूरी बताने वाले और कारसेवकों पर गोली चलाने को गलत नहीं मानने वाले आज आस्था की बात कर रहे हैं। जय हिंद