आखिरकार कहां जा रही सियासत
दो दशकों से राजनीति की जो तस्वीर दिखाई दे रहे है वो अपने आप में बहुत ही खतरनाक तस्वीर बनती जा रही है। 12 साल में देश की राजनीति में जिस तरह बदलाव आया है शायद ही किसी ने सोचा भी नहीं होगा। देश की राजनीति में तीन महिलाओं का बड़ा नाम था, सोनिया गांधी, मायावती और ममता बनर्जी। 12 साल में सोनिया गांधी बस तस्वीरों तक ही सीमित रह गई। कई बार की मुख्यमंत्री रहीं सुश्री मायावती की स्थिति आज ऐसी है कि किसी भी सदन में चाहे लोकसभा हो, विधानसभा हो या फिर विधान परिषद हो उनका एक भी सदस्य नहीं है। ये अपने आप में बहुत ही चिंता का विषय है। जिस देश में विपक्ष कमजोर होता है फिर सीधा उसका लोकतंत्र पर पड़ता है। निजी तौर पर तो मायावती के पास सुरक्षा व्यवस्था है, ताम-झाम भी है लेकिन आज उनकी पार्टी पूरी तरीके से हाशिए पर है। हालांकि उनका कमिटेड वोट बैंक आज भी उनके साथ है लेकिन जो जलवा कभी उनका था वो नहीं है। वो ना तो बोलती है और ना ही किसी कार्यक्रम में वो दिखाई देती है। सोनिया गांधी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। राजनीति उनको विरासत में मिली लेकिन 12 साल से वो भी हाशिए पर है। ताजा मामला बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का है। इंडिया गठबंधन जब बना था तो ये चर्चा चली थी कि ममता बनर्जी के अंदर वो टैलेंट है कि प्रधानमंत्री की उम्मीदवार भी घोषित की जा सकती है लेकिन यहां पर सोनिया आगे निकलीं। इतना ही नहीं भाजपा से अलग होने के बाद नीतीश कुमार को भी देश के पीएम के तौर पर प्रोजैक्ट करने की तैयारी थी लेकिन आज नीतीश कुमार कहां है उनका कुछ पता नहीं है। लगातार कई साल बिहार के मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार अब अज्ञातवास में चले गए हैं। जिस-जिस ने भी प्रधानमंत्री की कुर्सी की तरफ आंख लगाई आहिस्ता-आहिस्ता उनको बहुत ही प्यार के साथ उनको बर्फ में लगा दिया गया। आज ममता बनर्जी की स्थिति ये है कि उनके अपने ही साथ छोड़ रहे हैं। जिन सोनिया गांधी से उनका छत्तीस का आंकड़ा था आज उनसे गले लग रही हैं। वक्त ने कहां लाकर खड़ा कर दिया। ऐसी सियासत की तस्वीर देखने को मिलेगी किसी ने सोचा भी नहीं थी। दिल्ली वाले जोर का झटका बहुत धीरे से देते हैं इसका अंदाजा अब नेताओं को होने लगा है। बहरहाल, नेताओं को चाहिए इस गाने की पंक्तियों को हमेशा याद रखें।
आदमी को चाहिए वक्त से डरकर रहे,
कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज।।
जय हिंद