गाजियाबाद (युग करवट)। शायरी और कविता के क्षेत्र में प्रसिद्धि तो बहुत लोगों को मिल जाती है मगर उस रचनाकार का व्यक्तित्व भी बहुत अच्छा हो, ये ज़रूरी नहीं है। डॉ. बशीर बद्र की बात की जाए तो हर कोई यही कहेगा कि वो जितने अच्छे शायर थे, उतने ही अच्छे इंसान भी थे। उनके चले जाने से अदब की दुनिया में मायूसी छा जाना स्वाभाविक ही है। डॉ. बशीर बद्र से कई बार मेरी मुलाकात हुई। करीब ढाई दशक पहले तक गाजियाबाद के मुशायरों में उनका बहुत आना जाना था। एक पत्रकार के रूप में दो बार उनका इंटरव्यू भी किया। गणतंत्र दिवस के अवसर पर घंटाघर रामलीला मैदान में होने वाले मुशायरे में लगभग हर साल ही बशीर साहब का आना होता था। उनका नंबर अक्सर सुबह लगभग चार बजे ही आता था और उन्हें सुनने के लिए हजारों लोग बैठे कड़ी सर्दी में भी बैठे रहते थे। करीब 20 साल पहले वो तत्कालीन मेयर दिनेश चंद्र गर्ग के निवास पर भी आए थे और बहुत देर तक शहर के चुनिंदा श्रोताओं को शायरी सुनाई थी। मार्च, 2017 में भोपाल में उनके निवास पर भी मेरा जाना हुआ जब वो बीमारी की अवस्था में चारपाई पर ही थे। किसी को पहचानने की क्षमता लगभग खत्म हो चुकी थी। उस समय भोपाल में राम कथा वक्ता मोरारी बापू की राम कथा थी। बापू के साथ ही बशीर बद्र साहब के घर जाने का मौका मिला था। फोन पर उनकी पत्नी राहत के साथ बातचीत कर वहां पहुंचने का दिन और टाइम मेरे द्वारा ही तय हुआ था।
बशीर साहब की शायरी दुनिया के तमाम शायरों के मुकाबले कुछ अलग तरह की थी। बहुत ही सादगी के साथ वो दिल को छू देने वाली बात कहते थे। उनका व्यक्तित्व भी उतना ही सादगी भरा था। बातचीत के दौरान कभी एहसास ही नहीं होने देते थे कि वो दुनिया के सबसे बड़े शायरों में शुमार हैं। करीब 25 साल पहले राजनगर में एक लोकल टीवी चैनल के स्टूडियो में मुझे उनका इंटरव्यू लेने के लिए पहुंचना था। मैं लगभग आधे घंटे लेट पहुंचा था और माफी मांगते हुए उनसे कहा था कि बशीर साहबए माफ करना। पत्रकारिता की दुनिया में कभी-कभी वज़ह से और कभी- कभी बेवजह भागदौड़ हो जाती है। इस पर मुस्कुराते हुए उन्होंने अपने शेर सुनाए थे-
यूं ही बेसबब ना फिर करो, किसी शाम घर भी रहा करो, ये नए मिज़ाज का शहर है, जऱा फासले से मिला करो।
बशीर साहब के बारे में एक और बात कहना चाहूंगा। भारत के कुछ चुनिंदा बड़े शायरों ने उनके खिलाफ उनकी लोकप्रियता से चिढ़ कर बहुत साजिश कीं। मंच पर गाली गलौच तक बशीर साहब के साथ हुई लेकिन वो बराबर अपनी शायरी के सफर पर आगे बढ़ते रहे और अदब की दुनिया में ऐसे मुकाम पर पहुंच गए जहां पहुंचना बाकी लोगों के लिए आसान काम नहीं है।