गाजियाबाद (युग करवट)। भाजपा की प्रदेश की टीम कभी भी घोषित की जा सकती है। कई स्तर पर संवाद के बाद नई टीम की सूची तैयार करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, संगठन महासचिव बीएल संतोष और संघ के साथ कई दौर की चर्चा की। चर्चा के बाद उनकी ओर से केंद्रीय नेतृत्व को रिपोर्ट भेजी।
इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने नई टीम के गठन के लिए हरी झंडी दे दी है। गाजियाबाद के कई नेता पंकज चौधरी की टीम में जगह मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पिछले तकरीबन तीन महीनों से गाजियाबाद के कई नेता दिल्ली से लेकर लखनऊ तक घूमते देखे गए। भाजपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि गाजियाबाद से एक या दो लोगों को ही प्रदेश की टीम में जगह मिलने की संभावना है।
उधर गौतमबुद्घ नगर के भी कई नेता पंकज चौधरी की नई टीम का हिस्सा बनने को तैयार हैं। नोएडा के कई नेताओं को उम्मीद है कि उनकी लॉटरी लगेगी ही। क्षेत्रीय संगठन में मेरठ का दबदबा रहने के चांस ज्यादा बताए जा रहे हैं। हालांकि गाजियाबाद में पृथ्वी सिंह, अशोक मोंगा, प्रशांत चौधरी, बसंत त्यागी, अशु वर्मा, रूप चौधरी, अजय शर्मा, मानसिंह गोस्वामी जैसे कई नाम हैं जो प्रदेश की टीम के लिए योग्यता रखते हैं। मगर किसी को मौका मिलेगा कि नहीं यह अभी नहीं कहा जा सकता। यह भी बताया जा रहा है कि भाजपा की रणनीति सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का जवाब अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अगड़ा) से देने की है। इस समीकरण को साधने के लिए पार्टी सभी छह क्षेत्रीय इकाइयों के अध्यक्ष और सभी सात मोर्चे के अध्यक्ष के पद में बदलाव के साथ ही राज्य कार्यकारिणी में भी बड़ा बदलाव करेगी।
केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी मिलने के बाद राज्य अध्यक्ष पंकज चौधरी अपनी नई टीम की घोषणा कभी भी कर सकते हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक कई दौर की बैठकों के बाद नई टीम का खाका न सिर्फ तैयार कर लिया गया है, बल्कि इसे केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी भी मिल गई है। तय रणनीति के मुताबिक क्षेत्रीय इकाइयों, मोर्चों की कमान तय करने में अति पिछड़ा, गैरयादव पिछड़ा और अगड़ा वर्ग में संतुलन स्थापित किया जाएगा। इसी प्रकार नई कार्यकारिणी में 40 से 50 फीसदी जगह भी नए चेहरों से भरा जाएगा। नई कार्यकारिणी में भी अपने पीडीए को ही वरीयता दी जाएगी।
बीते लोकसभा चुनाव में अति पिछड़ा वर्ग के कश्यप, कहार, प्रजापति, बिंद, बुनकर पिछड़ा वर्ग के कुर्मी और दलित वर्ग के पासी, कोरी, वाल्मिकी और खटीक जातियों के बड़े हिस्से के सपा-कांग्रेस गठबंधन के साथ जाने से भाजपा का समीकरण गड़बड़ा गया था। नई टीम के जरिये भाजपा की रणनीति इन जातियों को भी साधने की है। इसके अलावा नई टीम के जरिये पार्टी की निगाहें क्षेत्रवार समीकरण को भी अपने पक्ष में करने की है।