‘आप’ में बगावत
गाजियाबाद (युग करवट)। आम आदमी पार्टी में जिस तरह राघव चड्ढा ने ऑपरेशन कमल चलाकर सात सांसदों को भाजपा में शामिल करा दिया उससे राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है। राघव चड्ढा कोई मंझा हुआ राजनीतिक व्यक्ति भी नहीं है और ना ही कोई उनका लंबा राजनीतिक इतिहास है लेकिन जिस तरह उन्होंने ऑपरेशन चलाया वो अपने आप में बड़े सवाल जरूर खड़े कर रहा है। राजनीति में पहले से ही भरोसे का टोटा था और चड्ढा ने ये कारनामा करके बचाखुचा भरोसे को भी तार-तार कर दिया। सवैंधानिक तौर पर क्या होगा क्या ये सांसद रहेंगे या नहीं रहेंगे ये अलग विषय है लेकिन राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी में एक विज्ञापन पढक़र आये थे। देश के जाने-माने कवि कुमार विश्वास के अनुसार आम आदमी पार्टी जब चुनाव लड़ रही थी और कुमार विश्वास पूरा संचालन कर रहे थे तब उन्होंने एक विज्ञापन दिया था और विज्ञापन पढक़र राघव चड्ढा जब कुमार विश्वास से मिले थे पांच लोगों के साथ राघव चड्ढा को एक विधानसभा में सर्वे के लिए लगाया था। उनके साथ चार-पांच लोग और भी थे। कुमार विश्वास के अनुसार चड्ढा अच्छी इंग्लिश बोलते हैं वो काम उन्होंने जल्दी कर दिया और यहीं से राघव चड्ढा आप का काम देखने लगे। कुमार विश्वास के अनुसार जिस पार्टी में वो रहे वहां लोकप्रियता होना ही इस बात का सबूत है कि वो ज्यादा दिन वहां नहीं रह सकता। बहरहाल एक सर्वेयर ने पूरा सर्वर आम आदमी पार्टी का डाउन कर दिया।
सांसद अशोक मित्तल का भाजपा में जाना खड़े कर रहा है सवाल
गाजियाबाद (युग करवट)। राघव चड्ढा द्वारा ऑपरेशन कमल के तहत आम आदमी पार्टी में जो भूचाल लाया गया है उससे आम आदमी पार्टी जरूर कमजोर हुई लेकिन इन सांसद में अशोक मित्तल का नाम ऐसा नाम है जिसके भाजपा में आने से भाजपा में ही अंदरखाने सवाल खड़े हो गये हैं। विपक्ष बार-बार जो ये दावे करता है कि ईडी और सीबीआई के जरिए विपक्ष को तोड़ा जाता है कमजोर किया जाता है इन दावों को अशोक मित्तल के आने से जरूर बल मिला। क्योंकि एक सप्ताह पहले अशोक मित्तल के खिलाफ ईडी की कार्रवाई हुई थी, छापेमारी हुई थी अब वही अशोक मित्तल भाजपा में आ गये हैं और उन्होंने भाजपा दामन थाम लिया है अब क्या ये कार्रवाई बंद हो जाएगी ये बड़ा सवाल है। इसीलिए कहा जाता है कि कभी-कभी जल्दबाजी में उठाये गए कदम भी बड़ा नुकसान कर जाते हैं।