विधानसभा चुनाव २०२७
उत्तर प्रदेश में २०२७ में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गये हैं। दरअसल, अगर चुनावी माहौल देखें तो भाजपा के बाद यूपी में समाजवादी पार्टी का माहौल अच्छा है और इसी माहौल का फायदा भाजपा के कुछ विधायक उठाना चाहते हैं। तीन दर्जन से अधिक विधायक भाजपा को बाय-बाय कहकर सपा के टिकट पर चुनाव लडऩा चाहते हैं। ये वो भाजपा के विधायक है जिनको अब इस बात की उम्मीद है कि पार्टी इस बार उन्हें टिकट नहीं देगी और उन्हें चुनाव लडऩा है इसलिए सपा के टिकट पर चुनाव लडऩे के इच्छुक हैं। लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अभी तक ऐसे विधायकों को कोई आश्वासन नहीं दिया। सूत्र बताते हैं कि अखिलेश यादव ने भाजपा छोडक़र सपा में आने की इच्छा रखने वाले विधायकों से कहा है कि वो उन्हें पार्टी में शामिल कर सकते हैं लेकिन पहले उन्हें वफादारी का सबूत देना होगा और वफादारी के तौर ये नवंबर में राज्यसभा की दस सीटों के लिए चुनाव होना है वर्तमान में नौ सीटों पर भाजपा के लोग हैं और एक सीट पर समाजवादी पार्टी। अखिलेश यादव ने सपा में आने वाले भाजपा विधायकों से कहा है कि नवंबर में राज्यसभा चुनाव के दौरान सपा अपने उम्मीदवार खड़ा करेगी और अगर वो वास्तव में सपा में आने चाहे हैं तो उन्हें सपा के उम्मीदवारों को वोट देना होगा इससे उनकी वफादारी साबित हो सकती है और फिर पार्टी उन पर विचार कर सकती है। हालांकि ये शर्त अपने आप में काफी अहम है क्योंकि अगर वफादारी दिखा भी दी और फिर भी टिकट नहीं मिला तो फिर वो किधर के भी नहीं रहेंगे लेकिन एक बात ये भी है कि चुनाव नवंबर में होना है और विधानसभा चुनाव दो महीने बाद यानि जनवरी या फरवरी में हो जाएंगे इसलिए भाजपा ऐसे बागी विधायकों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं करेगी क्योंकि कोई समय नहीं बचेगा। बहरहाल, चुनावी मौसम में इस तरह की वफादारी अभी कई बार अन्य दलों में दिखाना पड़ेगी इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन अखिलेश यादव भी अब बहुत ही सोच समझकर कदम उठा रहे हैं क्योंकि आया राम और गया राम का नुकसान सबसे ज्यादा उन्हीं की पार्टी को हुआ।
जय हिंद