नगर निगम में तेल का बड़ा खेल
रोजना ७ हजार से लेकर ८ आठ लीटर की है खपत
गाजियाबाद (युग करवट)। नगर निगम में वाहनों से भारी मात्रा में डीजल के नाम पर रोजना भष्टï्राचार हो रहा है। पहले भी नगर निगम में डीजल चोरी के आरोप लगते रहे है। नगर निगम के सरकारी पेट्रोल पंप पर रोजना ७ से लेकर आठ हजार लीटर डीजल नगर निगम की गाडियों पर खर्च किया जा रहा है। नगर निगम पिछले एक दो माह से २२ रूपये प्रति लीटर महंगा डीजल खरीद रहा है। नगर निगम सूत्रों की माने तो नगर निगम प्रतिदिन पौने दो लाख रूपये मंहगा डीजल खरीद रहे है। कई बार नगर निगम में सस्ती दरों पर डीजल खरीदने के प्राईवेट पेट्रोल पम्प मालिको ने आवेदन किया और लगभग १५ दिनों तक उधारी देने को कहा लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने सस्ती दरों से डीजल लेने को साफ इनकार कर दिया। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि ईरान में जारी संघर्ष की वजह से दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छूने लगी है। इसका असर भारत पर भी दिखना शुरू हो गया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। प्रीमियम पेट्रोल 2.09 प्रति लीटर महंगा हुआ तौ इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में 22.03 रुपये की बढ़ोतरी की गई। इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में 25 प्रतिशत से भी ज्यादा की बड़ी बढ़ोतरी है। डिपो के कर्मचारी ने बताया कि साहब डीजल से निगम की गाड़ी नहीं बल्कि अधिकारियों का घर चलता है। कर्मचारी के मुताबिक डिपो में मौजूद वाहनों के अनुसार शहर में केवल डीजल की खपत कम है, जबकि बाकी के डीजल की रकम बनकर अपने-अपने ठिकानों पर पहुंच जाती है। कर्मचारी ने बताया कि डीजल की इस खरीद फरोख्त में ऊपर से लेकर नीचे तक इस कदर मिलीभगत है कि एक बार मामले की शिकायत करने पर उसको सस्पेंड कर दिया गया था ।
डीजल मंहगा होने से नहीं हो रही है फागिंग
नगर निगम द्वारा डीजल महंगा आने पर शहर में होने वाली फागिंग को अभी बंद कर दी है। जिससे शहर में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। कई जगहों पर बढ़ते मच्छरों के प्रकोप के कारण बिमारी भी होने शुरू हो गई है।
पहले भी लग चुके है डीजल चोरी कराने के आरोप
पहले भी कई बार नगर निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों पर डीजल में भष्टï्राचार के आरोप लगते रहे है। नगर निगम में कूड़ा निस्तारण के नाम पर हर माह लाखों का खेल हो रहा है। निगम की जो गाडिय़ां डिपो के भीतर आराम कर रही होती हैं, उनके नाम पर निगम अफसर रोजाना हजारों लीटर डीजल डकार जाते हैं। निगम में हो रही डीजल की इस हेराफेरी में डिपो प्रभारियों के साथ-साथ विभाग के आला अफसर भी शामिल हैं। यही कारण है कि विभाग में कई बार डीजल घोटाले के खुलासे के बाद भी उच्च अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।