जब 22 मार्च को पूर्व सांसद केसी त्यागी ने पूर्व मंत्री अशोक यादव व अपने पुत्र अमरीश त्यागी के साथ रालोद की सदस्यता ली तो कुछ लोगों ने कई प्रश्न किए। हालांकि कुछ लोगों की जिज्ञासा तो तब ही समाप्त हो जानी चाहिए थी जब केसी त्यागी ने कहा कि वह संसद के दोनों सदनों के सदस्य रह चुके हैं और अब उनका कोई चुनाव लडऩे का मन नहीं है। मगर लोग हैं, बातें तो बनाते ही हैं। फिर कुछ लोगों ने शंका जतानी शुरू की कि अमरीश त्यागी कहीं मुरादनगर सीट से तो विधानसभा के टिकट की दावेदारी नहीं करने जा रहे हैं? इस संबंध में मुरादनगर विधायक अजितपाल त्यागी के बयान भी छापे गए। पुरानी कहावत है कि अल्प ज्ञान सदा दुख देता है। यहां भी यही बात साबित होती है। दिसंबर 2021 में अमरीश त्यागी भाजपा में शामिल हुए थे। उनके भाजपा ज्वाइन करते ही कुछ लोगों ने कहना शुरू किया कि अब अमरीश मुरादनगर से भाजपा के टिकट के लिए दावा करेंगे। ऐसे सवालों का जवाब खुद अमरीश त्यागी ने दिया था। उन्होंने कहा था कि जब तक अजितपाल त्यागी का इस सीट पर दावा है वह कभी मुरादनगर की ओर नहीं देखेंगे। लोग बात कितनी भी बनाएं मगर सच्चाई यही है कि अमरीश त्यागी ने कभी मुरादनगर सीट से दावेदारी नहीं की। आज भी यह बात पूरे विश्वास से कही जा सकती है कि ना 2027 में और ना उसके बाद अमरीश, अजितपाल त्यागी के रहते कभी मुरादनगर से टिकट नहीं मांगेंगे। अमरीश त्यागी भी अपने पिता की ही तरह उसूलों की राजनीति करते हैं और कभी उनसे समझौता नहीं करते। इसलिए लोगों को फिजूल की बातें नहीं बनानी चाहिए। हां कुछ लोगों को गॉसिप में आनंद आता है तो उनको यह बिलकुल करना चाहिए, क्योंकि किसी को अपने आनंद को नहीं मारना चाहिए। मैं पहले भी कई बार कह चुका हूं कि राजनीति में चर्चा का अपना विशेष महत्व है। जिनकी झोली खाली होती है उनकी चर्चा कोई नहीं करता। चर्चा भी उन्हीं की होती है जिनके पल्ले में कुछ अधिक होता है। तो आज अगर अमरीश त्यागी पश्चिम यूपी की राजनीति में सर्वाधिक चर्चा में हैं तो उसके पीछे भी कारण यही है कि लोग जानते हैं कि उनके पास अपना मजबूत जनाधार है।