चर्चा-ए-आम
लोकसभा एक, मुद्दे अनेक। हर बार जब कभी भी लोकसभा का कोई सत्र शुरू होता है तो उस समय ऐसे अनेकों मुद्दे पहले से ही संसद के दरवाजे पर खड़े होते हैं जिन पर विपक्ष खुलकर बहस करना चाहता है और उनमें से कुछ मुद्दों को प्रस्ताव बनाकर उस पर एक सीमित समय तक अपने विचार संसद के समक्ष रखना चाहता है। पिछले कुछ समय से ऐसी परिस्थितियां बनती आ रही हैं कि जिन मुददों पर विपक्ष जोर देकर बहस कराना चाहता है उसे सरकार किसी ना किसी तरह टालने की कोशिश करती है। ये एक बड़ा आधार बन जाता है जिसके चलते हर बार की लोकसभा कार्रवाई प्रभावित होती है और एक बड़े शोरगुल के बीच में सत्र अपना समय पूरा कर जाता है और जनहित का कोई बड़ा मुददा ना तो विचार में आ पाता है और ना ही उस पर कोई प्रस्ताव पारित हो पाता है। नौ मार्च को आरंभ हुए संसदीय सत्र में ऐसा ही कुछ पहले दिन से ही देखने को मिला। हालांकि पिछले सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के विरुद्ध 118 सांसदों के हस्ताक्षर से जो अविश्वास प्रस्ताव लाया गया उसे पिछले सत्र में मंजूरी तो मिल गई लेकिन उस पर बहस के लिए आगामी सत्र यानी नौ मार्च को आरंभ होने वाले सत्र के पहले ही दिन बहस पर रखे जाने का प्रस्ताव भी पारित हो गया लेकिन मौजूदा सत्र में स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास पर बहस शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने दो मोशन और लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत किए और कहा कि अविश्वास के प्रस्ताव से पहले इन दो प्रस्तावों पर अलग से बहस कराई जाए जिसे स्पीकर जगदंबिका पाल ने अनुमति नहीं दी। विपक्षी नेता चाहते थे कि सरकार पहले इस पर बात करे कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच दस दिन से चल रहे युद्ध पर उसका क्या स्टैंड है। खाड़ी क्षेत्र के देशों में जो एक करोड़ भारतीय अलग-अलग जगह फंसे हुए हैं उन्हें वापस भारत लाने की क्या योजना है। खाड़ी युद्ध से उत्पन्न हो रही गैस और तेल की भयानक कमी से निपटने के लिए सरकार ने क्या योजना बनाई है। यह मौजूदा जंग जैसे चल रही है अगर लंबी खिंचती है तो इससे भारत में बढऩे जा रही महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार ने क्या योजनाएं बनाई हैं। इस पर पूरी जानकारी विपक्ष और देश को दी जानी चाहिए। साथ ही अमेरिका के साथ हुए टैरिफ एग्रीमेंट में भारत किससे और कहां से तेल खरीदेगा इसकी जानकारी भी देश के सामने रखी जानी चाहिए। संसद के कार्यवाहक सभापति ने विपक्षी नेताओं के इन दोनों प्रस्तावों पर बहस कराने की अनुमति नहीं दी जिसके चलते पहले दिन ही लोकसभा की कार्यवाही बाधित हुई और उसे तीन बार स्थगित करना पड़ा। हालांकि इन दिनों संसद में बहस के लिए विपक्ष के पिटारे में बहुत सारे मुददे हैं। पश्चिमी बंगाल के विधानसभा चुनाव में टीएमसी जो मामला एसआईआर में अनियमितता का उठा रही है वो भी एक बड़ा मुददा है। पिछले दिनों महामहिम राष्ट्रपति की वेस्ट बंगाल यात्रा को लेकर जो विवाद खड़ा हुआ वो भी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। अमेरिका की ट्रेड डील अपने आप में एक बड़ा मुददा है। एपस्टीन फाइल्स में कुछ भारतीय नेताओं के नाम का आना भी एक बड़ा मुददा बना हुआ है। इन सभी मुददों को जोडक़र विपक्ष एक-एक करके संसद की बहस में लाना चाहता है और वह यह काम लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ चल रहे अविश्वास प्रस्ताव से पहले ही संसद में रखकर उस पर खुली बहस कराना चाहता है। जो स्थिति लोकसभा कार्यवाही की पहले ही दिन देखने को मिली उससे तो यही लगता है कि यह पूरा सत्र जो दो अप्रैल तक चलेगा इसी तरह बिना प्रश्न किए और उत्तर लिए बगैर ही पूरा हो जाएगा। क्योंकि प्रश्न रोज खड़े हो रहे हैं जिनके उत्तर सुगमता से नहीं मिल पा रहे।