सरकार केन्द्र में मोदी की हो या उत्तर प्रदेश में योगी की दोनों का ही दावा रहता है कि किसानों की आय दोगुनी करने पर काम किया है। पीएम किसान निधि दी जा रही है। मगर क्या सच में किसानों की हालत सुधरी है? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए किसी को पूर्वी यूपी के जिले में जाने की जरूरत नहीं है। दिल्ली से केवल 85 और गाजियाबाद से मात्र 35 किमी दूर हापुड़ हाफिजपुर मंडी का एक चक्कर लगाकर आइए। आपका सच से सामना हो जाएगा कि किसान आज भी किन हालातों में जी रहा है। आप शायद यकीन नहीं करेंगे कि हापुड़ की हाफिजपुर मंडी में किसानों से गोभी मात्र पचास पैसे किलो और आलू चार रुपए किलो खरीदा जा रहा है। अब आप खुद ही बता दीजिए कि आपकी गली में गोभी और आलू किस रेट आपको मिल रहा है। फुटकर में गली मुहल्लों में आलू 10 से 15 रुपए किलो और गोभी 15 से 20 रुपए किलो बिक रही है। ना तो किसानों को कुछ मिल रहा है, ना रसोई में सस्ती सब्जी आ रही है, लेकिन बिचौलिए पूरा मुनाफा कमा रहे हैं। हापुड़ की हाफिजपुर मंडी में आस-पास के करीब दो दर्जन जिलों के किसान गोभी लेकर पहुंचते हैं। एक अनुमान के मुताबिक एनसीआर के करीब तीन हजार किसान जिन्होंने आलू और गोभी की खेती की है तकरीबन बर्बादी की ओर हैं। इनमें गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्घनगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, अमरोहा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत आदि के किसान शामिल हैं। अब आप समझ लीजिए कि जब एनसीआर के किसान की हालत यह है तो दूर दराज के किसान को कितने कष्टï में जीना पड़ रहा होगा। हैरानी की बात यह है कि पश्चिम के जिलों के किसानों की बर्बादी पर किसी जनप्रतिनिधि ने एक शब्द तक नहीं बोला है। कोई इतना भर भी नहीं कह रहा है कि इस मामले को शासन के सामने रखेंगे और कुछ हर्जाना दिलाएंगे। पश्चिम यूपी के आलू और गोभी की खेती करने वाले किसानों की हालत ने इतना तो समझा ही दिया है कि सरकारें बदलती हैं, किसान की हालत नहीं, किसानों के लिए बनाई गई योजनाएं कागजों में रह जाती हैं।