ममता के प्रति अब नहीं रही ममता
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। दो राज्यों में पहले से ही भाजपा की सरकार थी। एक राज्य में कांग्रेस जीती, एक राज्य में फिल्म स्टार विजय ने इतिहास लिख दिया लेकिन भले ही दो राज्यों में भाजपा रिपीट हुई हो लेकिन इन तमाम राज्यों में पूरे देश की निगाहें पश्चिम बंगाल पर लगी हुई थी और यहां के परिणाम से कई राज्यों का भविष्य तय होना था। बंगाल से हुई जीत अब कई राज्यों के लिए भाजपा के लिए एक सुनहरी जीत है। दरअसल, भाजपा ने इस बार बहुत ही रणनीति के साथ चुनाव लड़ा ऐसे-ऐसे उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे जो किसी जमाने में टीएमसी के लिए काम करते थे और वो टीएमसी पर जीते थे। अगर ये कहा जाए कि भाजपा ने लोहे से लोहा काटा तो गलत नहीं होगा। इसके अलावा आधी आबादी ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर भरोसा किया। 4 मई के बाद शपथ ग्रहण में आऊंगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कॉन्फिडेंस की जीत हुई। झालमुडी प्रधानमंत्री ने खायी उसका एक संदेश गया। चुनाव में छोटी-छोटी बातें बड़े-बड़े संदेश दे देती हैं। डेढ़ साल पहले से ही आरएसएस ने पश्चिम बंगाल में अपने आप को सक्रिय कर दिया था और शाखाओं की संख्या बढ़ा दी थी। डेढ़ साल में चार हजार शाखाएं बढ़ाई गई और पूरे बंगाल में 12 हजार शाखाएं लगाई गई। जाहिर है कि आरएसएस की इस भूमिका को भी नहीं नकारा जा सकता। गाजियाबाद के सांसद जो पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान 18 दिन रहे वो साफ तौर पर कहते हैं कि पश्चिम बंगाल कोई हिंदू-मुस्लिम नहीं कर सकता और वहां पर भाजपा हिंदू-मुस्लिम के नाम पर चुनाव नहीं जीती बल्कि टीएमसी की गुंडागर्दी के खिलाफ लोग सडक़ों पर निकले और भाजपा पर भरोसा किया। महिलाओं के साथ वहां जो कुछ होता था वो बयान नहीं किया जा सकता। इसलिए महिलाओं ने अपनी आबरू और इज्जत की हिफाजत के लिए भाजपा पर भरोसा किया। बहरहाल, पश्चिम बंगाल की जीत अपने आप में एक बड़ा संदेश है और ये जीत भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए एक उत्साह बढ़ाने वाली है। जय हिंद