भाजपा और योगी सरकार की दृष्टिï से देखेंगे तो पाएंगे कि उत्तर प्रदेश में राम राज चल रहा है। अपराध शून्य हैं, व्यापारी आनंद में हैं और जनता चैन में है। मगर मेरा माथा तब ठनक जाता है, जब मैं मुख्यमंत्री के जनता दर्शन को देखता हूं। मुख्यमंत्री का जनता दर्शन गोरखपुर में लगे या लखनऊ में शिकायतकर्ताओं की भरमार रहती ही है। तकरीबन नौ साल हो गए योगी आदित्यनाथ को सरकार चलाते हुए। आखिर वह इस तरफ क्यों ध्यान नहीं देते कि उनके जनता दर्शन कार्यक्रम में इतनी अधिक संख्या में लोग शिकायत या समस्या लेकर पहुंचते क्यों हैं। मैं बहुत पहले से कहता आया हूं कि यदि जिले में पुलिस कप्तान या जहां कमिश्नरेट व्यवस्था है वहां पुलिस कमिश्नर कार्यालय में लोग समस्या लेकर पहुंचते हैं तो समझ लीजिए कि थाना स्तर पर जनता की सुनवाई सही से नहीं हो रही है। क्योंकि अगर चौकी थाना स्तर पर की समस्या का निदान हो जाएगा तो बड़े अधिकारी तक कोई आएगा ही क्यों? यही बात मुख्यमंत्री के जनता दर्शन कार्यक्रम पर भी लागू होती है। अगर जिला स्तर पर ही जनता की समस्या का समाधान कर दिया जाए तो कोई क्यों भला गोरखपुर और लखनऊ जाने लगा। मुख्यमंत्री तक लोग बड़ी संख्या में शिकायत-समस्या लेकर पहुंच रहे हैं तो इसका मतलब है कि जिला स्तर पर अधिकारी सुनवाई सही से नहीं कर रहे हैं। जनता जिला स्तर पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली से संतुष्टï नहीं है। यह पता लगाना चाहिए कि मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में किस जिले और किस विभाग से जुड़ी समस्या लेकर लोग सबसे अधिक आते हैं। फिर उस जिले के और विभाग के अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। प्रदेश को खुशहाल उस दिन माना जाना चाहिए जिस दिन उनके जनता दर्शन कार्यक्रम में एक भी शिकायतकर्ता ना पहुंचे। मुख्यमंत्री के यहां शिकायतों की भीड़ है तो लोग परेशान हैं, उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।