यूपी भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारियों की सूची
लखनऊ (युग करवट)। भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा उत्तर प्रदेश की सूची को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।
अल्पसंख्यक मोर्चे में ऐसे लोगों को पदाधिकारी बना दिया गया है जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हैं और उनके ऊपर कई तरह के आरोप हैं। इस संबंध में कई स्तर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित कई अन्य नेताओं को अवगत कराया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ऐसे लोगों को भी पदाधिकारी बनाया गया है जिन्हें गाजियाबाद के जिलाध्यक्ष सौलत पाशा ने मुकदमा दर्ज होने के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया था। बताते हैं कि उन्हें प्रदेश की टीम में पदाधिकारी बनाया गया है। हालांकि इस संबंध में एक जनप्रतिनिधि द्वारा भाजपा हाईकमान को लिखित में अवगत भी करा दिया है। एक और पदाधिकारी हैं जिनके खिलाफ अवैध कब्जे को लेकर जो शिकायतें थीं उन्हें भी मोर्चा में प्रदेश की टीम में जगह दी गई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूरे प्रदेश में जिस तरह से सूची बनाई है और पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है उसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं और इसमें कोई खेला होने की भी चर्चा है। किस तरह का खेला हुआ है ये तो भाजपा हाईकमान को जांच के बाद ही पता चलेगा। ये भी बताया गय है कि जो लोग लंबे समय से अल्पसंख्यक मोर्चा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे उन्हें हाशिये पर धर दिया गया और ऐसे लोगों को मोर्चे में जिम्मेदारी नहीं दी गई जो कभी पार्टी के कार्यक्रमों में दिखाई भी नहीं देते थे और वो दूसरे कार्यों में लगे रहते थे, लेकिन अपनी मजबूत व्यवस्था के कारण उन्हें प्रदेश में जगह दी गई है।
इस संबंध में इंद्रेश कुमार को भी लिखित में अवगत कराया गया है और मांग की गई है जिन लोगों को प्रदेश की टीम में जगह दी गई है उनकी जांच करा ली जाए। ताकि सही लोग पार्टी में बने रहें। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश की टीम में कई लोगों ने जो लंबे समय से पार्टी का झंडा बुलंद किये हुए है और सत्ता आने से पहले से ही भाजपा का झंडा बुलंद किये हुए थे उनको पार्टी ने मोर्चे में कोई जगह नहीं दी। हालांकि उन्होंने इस संबंध में प्रदेश की सूची जारी होने से पहले ही अपने राजनीतिक आकाओं से सिफारिश भी कराई थी, लेकिन व्यवस्था और खेला के आगे प्रदेश टीम में कोई जगह नहीं मिल पाई।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अब उन लोगों को अब ना ‘खुदा ही मिला ना विसाले सनम ना इधर के रहे न उधर, के’ अब ऐसी स्थिति में वो अपने आप को महसूस कर रहे हैं। अब देखना है कि प्रदेश की कमेटी को लेकर जो शिकायतें की गई हैं क्या उस पर हाईकमान निर्णय लेगा या फिर जो खेला हुआ है वो खेला ही रहेगा।