लखनऊ (युग करवट)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नवंबर में उत्तर प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों का दौरा करने की तैयारी में हैं। उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की चुनौती के बीच शाह की सक्रियता इसलिए अहम है क्योंकि 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की बड़ी जीत के पीछे संगठन विस्तार, बूथ प्रबंधन और सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की सीटें 2019 की 62 से घटकर 33 रह गईं जबकि समाजवादी पार्टी 37 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई। इन नतीजों ने भाजपा के उस सामाजिक गठबंधन पर सवाल खड़े किए जिसके दम पर पार्टी ने लगातार चुनावी सफलताएं हासिल की थीं।
माना जा रहा है कि शाह अब इसी गठबंधन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश करेंगे। शाह की रणनीति का पहला हिस्सा संगठन को चुनावी मोड में लाना है। नवंबर में पश्चिम, अवध, काशी, ब्रज, गोरखपुर और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रों में अलग-अलग बैठकें कर जमीनी फीडबैक लेने की योजना है। इन बैठकों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौरान कई सीटों पर भाजपा को अपने मजबूत माने जाने वाले इलाकों में भी चुनौती मिली। पार्टी को यह पता करना होगा कि हार या कमजोर प्रदर्शन की वजह स्थानीय उम्मीदवारों के प्रति नाराजगी थी, संगठन की निष्क्रियता, सहयोगी दलों के साथ तालमेल की कमी या सामाजिक समीकरणों में बदलाव। भाजपा के सामने चुनौती यह भी है कि चुनावी जिम्मेदारियों के बंटवारे के साथ संगठन के भीतर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भरोसा बहाल किया जाए।