यूपी विधानसभा चुनाव
विधानसभा चुनाव २०२७ में इस बार उत्तर प्रदेश में कई नये चेहरों की दस्तक होगी। भाजपा और समाजवादी पार्टी इस बार नये चेहरों को मौका देगी। इतना ही नहीं बुजुर्ग हो चुके नेताओं को संगठन में जिम्मेदारी दी जाएगी साथ ही कई बार चुनाव लड़ चुके नेताओं को भी अब मौका मिलना आसान नहीं है। एक बार चुनाव लड़ चुके व्यक्ति को दोबारा टिकट मिलने की संभावना है लेकिन तीन और चार बार चुनाव लड़ चुके नेताओं को मौका नहीं मिलेगा। नये कलेवर और जोश के साथ नये लोगों को मौका दिया जाएगा। तीसरी आंख को पता चला है कि गाजियाबाद में भी कुछ बड़ा बदलाव हो सकता है और पहली बार चुनाव लड़े एक विधायक को पार्टी फिर मौका दे सकती है लेकिन उनकी सीट पर संशय है कि वो मौजूदा सीट से लडेंगे या फिर पड़ोस की सीट पर उन्हें मौका दिया जाएगा। लेकिन ये बात तय है कि उन्हें कंसीडर जरूर किया जाएगा। यूपी में दंपति विधायक बनने वाले प्रशांत चौधरी भी इस बार नई सीट से चुनाव लड़ेंगे। भाजपा उन्हें दो सीटों में से एक सीट पर चुनाव लड़ाने का विचार कर रही है। एक सीट गाजियाबाद की है और एक पड़ोसी जनपद की है। भाजपा को पता है कि प्रशांत चौधरी उनके लिए फायदे का सौदा है और वो जिस सीट से भी खड़े होंगे जीत दर्ज कराएंगे। तीन सीटों पर पेच फंसा हुआ है और कुछ बड़े बदलाव के संकेत है। धौलाना विधानसभा सीट पर भी इस बार कोई बड़ा खेला होने वाला है। मौजूदा में धर्मेश तोमर भाजपा के टिकट पर विधायक हैं। हालांकि धर्मेश तोमर की अपनी एक मजबूत छवि है। पार्टी उन्हें आसानी से नजरअंदाज नहीं कर सकती लेकिन यहां किसी बड़े चेहरे का नाम चल रहा है। ये बड़े चेहरे सीधे दिल्ली से जुड़े हैं और एक मजबूत परिवार से जुड़े होने के कारण यदि वो चाहेंगे तो पार्टी उन्हें मौका दे सकती है। वहीं समाजवादी पार्टी में भी धौलाना सीट को लेकर बड़ा खेला सकती है। एक अन्य सीट पर भी एक मजूबत दावेदारी सामने आयी है। यहां पर पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के खास व्यक्ति इस सीट पर दावेदारी कर रहे हैं और उन्होंने अपना सम्पर्क भी शुरू कर दिया है। कार्यकर्ताओं से वो मिल भी रहे हैं। वहीं अगर वैश्य की बात की जाए तो एक सीट पर अगर बदलाव होता है तो भाजपा के पास वैश्य समाज में तीन बड़े मजबूत चेहरे हैं जो चुनाव का माहौल बदल सकते हैं। इनमें नगर पालिका पिलखुवा के चेयरमैन विभू बंसल, पवन गोयल और महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल हैं। तीनों ऐसे नाम है जो बहुत ही मजबूती के साथ चुनाव ही नहीं लड़ेंगे बल्कि अच्छी लीड भी देंगे। बहरहाल, अब देखना है कि ये सब चीजें चर्चाओं तक रहेंगी या कुछ खबरें भी बनेंगी। जय हिंद