गाजियाबाद (युग करवट)। कल पंजाबी-सिख समाज सम्मेलन होने जा रहा है। हालांकि ये हर जनपद में हो रहा है। लेकिन चुनावी मौसम में इस तरह के सम्मेलन जरूर अपना एक संदेश छोड़ते हैं। अगर गाजियाबाद की बात की जाए तो यहां पर पंजाबी समाज की अच्छी संख्या है लेकिन कोई भी राजनीतिक दल इनके बारे में नहीं सोचता।
हर चुनाव में पंजाबी समाज अपनी दावेदारी पेश करता है लेकिन उस पर कोई भी ध्यान नहीं देता। सिख समाज की अच्छी संख्या है। यहां ये भी उल्लेखनीय है कि पंजाबी समाज भारतीय जनता पार्टी का कमिटेड वोट है लेकिन जब कुछ देने की बात आती है तो भाजपा हाईकमान पंजाबी समाज को भूल जाता है। कोई भी विधानसभा का चुनाव हो उसमें पंजाबी समाज को नजरअंदाज कर दिया जाता है। लंबे संघर्ष के बाद अशोक मोंगा को भाजपा ने क्षेत्रीय टीम में जरूर महामंत्री बनाया है लेकिन बात अगर विधानसभा के टिकट की आती है तो फिर दूसरे समाज के लोगों को टिकट दे दिया जाता है। सिख समाज की बात करें तो गाजियाबाद में इन्द्रजीत सिंह टीटू एक ऐसा नाम है जो अपने समाज के अलावा सभी धर्म और जातियों में उनका एक अलग ही संंबंध हैं। वो सभी को साथ हमेशा दुख -सुख में खड़े रहते हैं। लेकिन कभी किसी दल ने उनको उनके सम्मान के हिसाब से उन्हें कुछ नहीं दिया लंबे समय तक वो कांगे्रस में रहे और आज वो भाजपा के सहयोगी दल रालोद में हैं। हर बार वो भी प्रयास करते हैं लेकिन हमेशा उनको भी मायूसी ही मिलती है। दरअसल, भाजपा का टिकट दो समाजों के आसपास ही घूमता रहता है और कभी कमिटेड वोट की तरफ ध्यान नहीं दिया। अगर वास्तव में कमिटेड वोट कहीं और चला जाए तो तस्वीर कुछ और ही हो सकती है। लेकिन पंजाबी और सिख समाज कुछ नहीं मिलने के बाद भाजपा का झंडा बुलंद किये हुए हैं।