जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
देश की राजधानी दिल्ली पर जो चाह रहा था वो कब्जा कर रहा था। रातोंरात बनी पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करके जरूर अपनी ताकत दिखाई और सरकार को झुकना पड़ा। पहली बार 12 साल में मोदी सरकार के किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ। लेकिन हर बार दिल्ली पर कोई कब्जा कर लेगा ये भी उसकी भूल है। 20 जुलाई के बाद जिस तरह से दिल्ली ने तैयारियां की उसका असर दिखाई दिया। हालांकि 10 अक्टूबर को लेकर दिल्ली वालों को जरूर कैद कर दिया गया। 40 हजार जवान कॉकरोच जनता पार्टी के लोगों को रोकने के लिए लगाये और दिल्ली पुलिस सफल भी रही। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली को कैद करने पर पहले नाराजगी जरूर दिखाई लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी पुलिस की व्यवस्था को सही बताया। ये सही है कि राजधानी पर लोग इसी तरह सडक़ों पर उतर जाये तो फिर देश की तस्वीर क्या होगी। ये ठीक है कि लोकतंत्र में आवाज उठाने का अधिकार है लेकिन इस अधिकार का मतलब ये नहीं कि आप कानून और संविधान के खिलाफ काम करें। अब जंतर-मंतर पर कोई प्रदर्शन नहीं होगा। अब कांगे्रस के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि जंतर-मंतर लेकर रहकर रहेंगे ये क्या बयान है। तीसरी आंख ने देखा कि अब केवल आंदोलन को लंबा खींचने के अलावा कुछ नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने को लेकर जो आंदोलन चल रहा है उसमें अब कोई दम इसलिए दिखाई नहीं दे रहा है कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। एसआईआर को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट पहले ही अपनी राय दे चुका है। विपक्ष के तमाम नेता जब राष्टï्रपति से मिले थे तब राष्टï्रपति ने भी विपक्ष से सबूत मांगे थे अब सबूत के तौर पर विपक्ष के पास केवल शब्द ही हैं इसके अलावा कुछ नहीं है। कॉकरोच पार्टी को इस बार दिल्ली ने जोर का झटका धीरे से दे दिया। उनके दो युवा नेताओं को तिहाड़ भेज दिया। इसलिए अब तिहाड़ की हवा खाने के बाद उनकी क्या स्थिति होगी ये भी देखने वाली बात है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख दीपके कहते हैं कि वो 16 अक्टूबर को कनाट प्लेस पर झंडा लहरायेंगे। उनकी भी बोलती बदल गई। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर वो दिल्ली घेर रहे थे अब खाली तिरंगा लहराने की बात कर रहे हैं। तिरंगा लहराने को कौन रोक सकता है लेकिन को लेकर भी अगर राजनीति की जाएगी तो ये भी सही नहीं है। भारत का तिरंगा हमेशा ऊंचा रहे उसको लेकर कोई राजनीति नहीं होना चाहिए। बहरहाल , अब दिल्ली जाम करना आसान नहीं है।
खराब वक्त में इज्जत संभाले हुए,
कभी जेब ना रखे सिक्के उछाले हुए,
डसा गया हूं मैं लेकिन इलाज जानता हूं,
ये सांप है तो मेरी आस्तीन के पाले हुए हैं।
जय हिद