किस तरह की हो रही है राजनीति
विशेष संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पूरा विपक्ष एक सप्ताह से आवाज बुलंद कर रहा है। संसद से शुरू हुआ ये आंदोलन अब सडक़ों पर चल रहा है। पूरे आंदोलन को कांगे्रस लीड कर रही है। लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला और निकलने वाला भी नहीं है। क्योंकि सडक़ पर कोई फैसले नहीं होते और वो भी खासकर राजनीतिक दलों के। जनता के आगे सरकार जरूर झुकती है और वो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के मामले में झुकी भी। कांग्रेस के आंदोलन में केवल उनकी पार्टी के सांसद या अन्य विपक्षी दल के सांसद हैं। जनता का दूर से दूर तक कोई साथ नहीं है। स्वाभाविक है कि ये जनआंदोलन नहीं है ये एक पार्टी का आंदोलन है। सरकारें केवल जनआंदोलन के आगे ही झुकती है। विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन कर रहा है और सरकार उनकी सुरक्षा को और मजबूत कर रही है। देश के नामचीन जज चुनाव आयुक्त के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। विपक्ष के आंदोलन को ये सेवानिवृत्त न्यायाधीश लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहे हैं। जाहिर है इस आंदोलन में विपक्ष को कामयाबी नहीं मिलेगी। ये बात उन्हें भी पता है वो भी केवल राजनीति ही कर रहे हैं। स्वाभाविक है कि राजनीतिक दल राजनीति ही करते हैं। एसआईआर को लेकर आंदोलन हो रहा है। एसआईआर सीधे तौर पर जनता से जुड़ा है फिर जनता कहां है। वहीं देश में इतने गंभीर मुद्दे हैं जिन पर विपक्ष कभी आवाज बुलंद नहीं करता। यूपीआई का पेमेंट बढ़ा दिया गया। अब रेपो रेट बढ़ा दिया। ईएमआई बढ़ गई, आम आदमी महंगाई से जूझ रहा है, गरीब की जेब पर ईएमआई का बोझ बढ़ गया लेकिन विपक्ष को ये दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे मुद्दे को लेकर सरकार का घेराव हो रहा है और ये मुद्दा राजनीतिक दलों से जुड़ा है अगर ज्ञानेश कुमार के अलावा विपक्ष सरकार को कई और गंभीर मुद्दों को लेकर घेरे तो स्वाभाविक है आम आदमी उससे जुड़ेगा क्योंकि ये गंभीर मुद्दे आम आदमी से जुड़े हैं, आम आदमी की जेब से जुड़े है, आम आदमी की कमाई से जुड़े। किसी भी एक विपक्षी दल ने बढ़ती महंगाई पर कोई आवाज बुलंद नहीं की। धन्यवाद सुप्रीम कोर्ट का कि उसने एक ऐसे मुद्दे का संज्ञान लिया जो आम आदमी से जुड़ा था। दवाईयों के मनमाने रेट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया वो वास्तव में सराहनीय है। 25 रुपये की गोली 300 रुपये में मिलती है। चार हजार का इंजेक्शन 49 हजार में मिलता है। इस पर कभी विपक्ष ने कोई आवाज बुलंद नहीं की। फाइव स्टार होटलों की तरह अस्पताल काम कर रहे हैं। देश के बड़े अस्पतालों में आप चले जाइये वहां आपको बकायदा पैकेज मिलेगा। आपकी हैसियत के हिसाब से अस्पताल का मैनेजमेंट आप से बात करेगा उसमें ना डॉक्टर होंगे ना कोई और होगा। सीधे वो लोग होंगे जो अस्पताल का मैनजमेंट या ये कहा जाए कि अस्पताल का मार्केटिंग देखते हैं वो ही आप से रूबरू होंगे। इस पर कभी विपक्ष ने आवाज नहीं उठाई। इसलिए विपक्ष की जिम्मेदारी है कि आम आदमी से संबंधित मुद्दो को लेकर आवाज बुलंद करें और सरकार को घेरे लेकिन ऐसा नहीं हो रहा, केवल ज्ञानेश कुमार के लिए बैठे हैं। जरूरत है जनहित के मुद्दे उठाने की, जनआंदोलन ही हमेशा कामयाब रहा है।