गाजियाबाद (युग करवट)। यूपी में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। सभी राजनीतिक दल अपनी ताकत बढ़ाने में लगे हैं। लोग जातिगत आंकडों के हिसाब से अलग अलग विधानसभा सीट पर संभावित प्रत्याशी को लेकर दावेारी भी कर रहे हैं।
गाजियाबाद की पांच सीटों की बात करें तो साहिबाबाद से सुनील शर्मा, लोनी से नंदकिशोर गुर्जर, मोदीनगर से मंजू सिवाच, मुरादनगर से अजीत पाल त्यागी और गाजियाबाद से संजीव शर्मा विधायक हैं। इस तरह दो ब्राह्मïण, एक गुर्जर, एक जाट, एक त्यागी विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विधान परिषद सदस्यों की बात करें तो दिनेश गोयल वैश्य हैं और नरेन्द्र कश्यप पिछड़े वर्ग से हैं। गाजियाबाद की महापौर सुनीता दयाल भी वैश्य वर्ग से हैं। भाजपा के महानगर अध्यक्ष भी वैश्य वर्ग से ही हैं। जहां तक त्यागी समाज की बात है तो यह समाज भाजपा का कोर वोटर है। त्यागी समाज का बड़ा आरोप रहा है कि भाजपा ने त्यागी समाज को उसकी हिस्सेदारी के हिसाब से कभी भागीदारी नहीं दी। गाजियाबाद की पांचोंं विधानसभाओ में से एक भी ऐसी नहीं है जहां त्यागी मतदाता निर्णायक भूमिका में ना हो। जब गाजियाबाद एक ही विधानसभा सीट थी तब यहां से बालेश्वर त्यागी विधायक चुने गए। उस समय मुरादनगर से राजपाल त्यागी और गाजियाबाद से बालेश्वर त्यागी दो विधायक त्यागी समाज से होते थे। कांग्रेस नेता सतीश त्यागी ने भी गाजियाबाद सीट से उपचुनाव लड़ा था और 52 हजार से अधिक वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। उसके बाद गाजियाबाद से अलग की गई साहिबाबाद सीट से भी उन्होंने विधानसभा का चुनाव लड़ा उस बार भी उन्हें 51 हजार से अधिक वोट मिले थे। साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में भी त्यागी मतदाता संख्या के हिसाब से दूसरे स्थान पर बताए जाते हैं। जानकार बताते हैं कि साहिबाबाद विधानसभा में त्यागी समाज के बाद ब्राह्मïण, मुस्लिम, उत्तराखंडी आदि आते हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में प्रवासी मतदाताओं की संख्या कहीं अधिक है। यहां प्रहलादगढी, मकनपुर, घूकना, सिहानी जैसे कई बड़े गांव हैं जो त्यागी बाहुल्य हैं। इसके साथ ही वसुंधरा, इंद्रापुरम, मोहननगर, कौशांबी, राजेन्द्र नगर जैसी कितनी ही कालोनियां हैं जहां त्यागी समाज की बाहुलता है। चुनावी रणनीतिकार सवाल करते हैं कि साहिबाबाद सीट से भाजपा के टिकट पर तयागी समाज की दावेदारी को क्यों स्वीकार नहीं किया जाता।