कौन होगा जिम्मेदार
दिल्ली में प्रदर्शन के नाम पर परसों से जो कुछ हो रहा है उसे सही नहीं ठहराया जा सकता। लोकतंत्र में सभी को आवाज उठाने का अधिकार है लेकिन अधिकार के नाम पर अराजकता करने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती। जिस तरह प्रदर्शन के नाम पर गाडिय़ां तोड़ी गई, संसद भवन तक पहुंचे गये, प्रधानमंत्री के आवास के पास प्रदर्शन किया। आखिरकार ये कहां तक सही है। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व किसके हाथ में था ये किसी को नहीं पता। सीजेपी के पदाधिकारी आंदोलन की कमान सही तरीके से नहीं संभाल पाये और सडक़ों पर तांडव दिखाई दिया। विपक्ष के नेताओं को केवल अपनी राजनीति के अलावा कुछ नहीं है। देश की सुरक्षा व्यवस्था तार-तार की गई। संसद भवन और प्रधानमंत्री आवास पर जिस तरह से हंगामा किया गया है, अराजकता हुई, उसे कोई सही नहीं ठहरा सकता। ये ठीक है कि बच्चे अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं लेकिन उनके बीच कौनसी नकारात्मक शक्तियां आकर अराजकता फैला रही है इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। पुलिस ने बल प्रयोग भी किया उसको लेकर विपक्ष हमलावर है लेकिन प्रदर्शन के नाम पर जो अराजकता हुई उसका जिम्मेदार कौन है। लोकतंत्र में अधिकार मिलने का मतलब ये नहीं है कि आप देश की सुरक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करें। आखिरकार प्रदर्शनकारी संसद भवन तक कैसे पहुंच गये, प्रधानमंत्री के आवास तक कैसे पहुंचे। अपने भविष्य को लेकर बच्चे जो आंदोलन कर रहे हैं वो किसी भी हाल में अराजक नहीं हो सकते, वो हिंसा पर नही उतर सकते, फिर आखिरकार प्रदर्शन में अराजकता फैलाने वाले कहां से आये। क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है? आंदोलन कैसे हिंसा में बदल गया ये बड़ा सवाल है। कल दिल्ली का दिल कहा जाने वाला कनाट पैलेस जहां अद्र्घ सैनिक बल के एक जवान को घेरा गया आखिरकार ये कहां तक सही था। प्रदर्शन के नाम पर अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था सबसे पहले है, देश की सुरक्षा सबसे पहले है और जो लोग लोकतंत्र के नाम पर प्रदर्शन कर रहे हैं उन्हें ये बात अच्छी तरह समझना चाहिए कि उनके आंदोलन में कोई नकारात्मक शक्तियां शामिल हो गई है जो देश की शांति व्यवस्था के लिए खतरा बन सकती है। बातचीत से बड़ी-बड़ी समस्याओं का हल निकलता है। आंदोलन का रास्ता छोडक़र एक बार फिर सरकार से बातचीत की जाए और शांतिपूर्ण तरीके से समस्या का हल निकाला जाए। जय हिंद