विधानसभा चुनाव २०२७
विधानसभा चुनाव २०२७ को लेकर भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन की चर्चाएं राजनीतिक गलियारे में खूब चल रही हैं। हालांकि बसपा प्रमुख मायावती कई बार कह चुकी है कि वो किसी के साथ गठबंधन नहीं करेंगी। लेकिन चुनावी मौसम में कब कौन किसके साथ हो जाए कुछ नहीं कहा जा सकता। आज की राजनीति में ना शब्दों का कोई मान और ना ही समन्वय और आस्था कहीं बचा है। अब तो राजनीतिक लाभ जहां दिखाई दिया उसी के साथ हो लिए। दरअसल, यूपी में भाजपा की स्थिति २०१७ की तरह नहीं है। २०२४ के लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा इसीलिए बसपा से गठबंधन करके वो एक तरह से दलित वोटों को अपने पक्ष में करने के चक्कर में है। बसपा प्रमुख मायावती की धाक भी अब पहले जैसी नहीं रही हालांकि उनके समाज का वोटर आज भी उनके साथ इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता। दरअसल, पिछले छह महीने से जो भी तस्वीर सामने आ रही है भाजपा के नेता कहीं भी बसपा को निशाने पर नहीं ले रहे हैं। बल्कि गेस्टहाउस कांड को लेकर जरूर चर्चा कर रहे हैं। कल नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर यूपी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया। इस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में बसपा प्रमुख मायावती को लेकर जिस तरह की बयानबाजी की उससे यही लगता है कि कहीं ना कहीं भाजपा बसपा प्रमुख के प्रति नरम दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैसे एक दलित महिला के साथ गेस्ट हाउस में इस तरह घटना हुई ये अपने आप में निदंनीय है। बार-बार उन्होंने मायावती को लेकर समाजवादी पार्टी को घेरा। हालांकि ये पुराने जख्म है जिन्हें अब कुरेदना सही नहीं है। इस गेस्ट हाउस कांड के बाद अखिलेश यादव और मायावती के बीच गठबंधन भी हुआ, बुआ और भतीजे का रिश्ता भी बना, दोनों ने मिलकर चुनाव भी लड़ा लेकिन कुछ मजबूरियों के कारण गठबंधन टूट गया लेकिन भाजपा गेस्ट हाउस कांड पर फिर बयानबाजी कर रही है और आज की जनरेशन जिसको शायद इस कांड के बारे में जानकारी ना हो उस तक पहुंचाने का प्रयास हो रहा है। पूरी तरह से भाजपा के नेताओं की बयानबाजी बसपा प्रमुख को खुश करने के लिए हो रही है ऐसा लग रहा है। अब देखना है कि इस बयानबाजी का असर बसपा प्रमुख को कितना होता है और क्या एक बार भाजपा और बसपा मिलकर चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। क्योंकि सभी के लिए सत्ता जरूरी है। जय हिंद