विधानसभा चुनाव २०२७
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मैनेजमेंट गुरु विनोद तावड़े जब-जब लखनऊ आते हैं तब अलग-अलग चर्चाएं शुरू हो जाती हैं। २०२७ के विधानसभा चुनाव से पहले तावड़े 25 दिन में दो बार लखनऊ आ चुके हैं। हालांकि इस बार उनके आने के पीछे महेंद्र सिंह की बेटी का विवाह था लेकिन विवाह के बाद संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह के साथ अलग कमरे में एक घंटे जो गोपनीय मीटिंग हुई वो काफी चर्चा में है। इस बार वो केवल संगठन मंत्री से मिले और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से उनकी दो बार फोन पर वार्ता हुई। इससे पहले जब तावड़े आये थे तो दोनों उप मुख्यमंत्रियों से उनकी मुलाकात हुई थी। दरअसल, दो दिन पहले जो तावड़े की गोपनीय मीटिंग हुई है वो एक तरह से भाजपा का राजनीतिक एक्सरे किया है। तावड़े बहुत ही ध्यानपूर्वक हर चीज को बहुत बारीकी से देखते हैं और फिर दिल्ली जाकर रिपोर्ट करते हैं। उनकी रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि बैठक बहुत गोपनीय थी लेकिन फिर भी कुछ जो छन-छनकर बाहर निकला है उसका सार यही है कि यूपी में कुछ जातियां भाजपा काफी नाराज है। संगठन मंत्री से मुलाकात से भी उन्हें काफी कुछ जानकारियां मिली है। दरअसल, संगठन मंत्री के पास बूथ स्तर तक की जानकारी होती है। इसलिए ये मुलाकात काफी अहम थी। हालांकि पहले के संगठन मंत्रियों और आज के संगठन मंत्रियों में काफी फर्क आ गया है और इसका उदाहरण अभी हाल ही में मनोनीत हुए कुछ नेताओं की छवि को लेकर भी सामने आया है। पूर्वांचल में कई ऐसे लोगों को जिम्मेदारियां दी गई हैं जिनका रिकॉर्ड ठीक नहीं है फिर संगठन मंत्री को काफी जानकारी रहती है। सूत्र बताते हैं कि तीन जातियों की नाराजगी भाजपा से कुछ ज्यादा ही है। यही कारण है कि नौ माह के लिए ही सही मंत्रिमंडल का विस्तार करना अब जरूरी हो गया है। ये मंत्रिमंडल कोई सरकारी विस्तार नहीं होगा अगर ये कहा जाए कि २०२७ के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जातीय संतुलन और क्षेत्रीय मैनेजमेंट इस मंत्रिमंडल में दिखाई देगा। बहरहाल, इस बार विनोद तावड़े का दौरा इस तरीके से एक ऑपरेशन कहा जा सकता है। फाइल तैयार हो चुकी है और अब दिल्ली वाले इस पर नजर डालेंगे क्योंकि दिल्ली के बिना यूपी में पत्ता भी नहीं हिल सकता इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता। जय हिंद