कानून का राज कैसे होगा स्थापित
भाजपा सरकार में कहा जाता है कि अधिकारी शांत स्वभाव के साथ काम करते हैं। जब-जब भी भाजपा की सरकारें रही अफसरों के बारे में यही राय रही। एक कहावत है कि जैसा कमांडर वैसी फोर्स। अब यूपी का कमांडर अगर सख्त होगा तो स्वाभाविक है उसके अधिनस्थ भी उतने ही सख्त होंगे। आईपीएस अजयपाल शर्मा की कार्यप्रणाली पर अगर आप नजर डाले तो अपराधियों के खिलाफ जितने सख्त एक्शन अजयपाल ने लिये हैं ऐसे कम ही अधिकारी होते हैं। अब पुलिस अधिकारी अगर कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए सख्त रवैया अपनाएंगे तो फिर क्या करेंगे। पश्चिमी बंगाल में आईपीएस अजयपाल शर्मा ने कानून व्यवस्था के खिलाफ काम करने वालों को चेतावनी दी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जो लोग कानून तोड़ेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अब इसमें कहां अजयपाल शर्मा गलत हैं। लेकिन क्योंकि वो यूपी से हैं पश्चिमी बंगाल गये हैं और जिनको वो लेकर सख्ती की बात कह रहे हैं वो सत्तारूढ दल टीएमसी के उम्मीदवार हैं। अजयपाल शर्मा की सख्ती को ये आलम हुआ कि कल मतदान में कहीं भी कोई बड़ी घटना नहीं हुई। जाहिर है कि चुनाव आयोग ऐसे अफसरों को ही तैनात करता है जिनकी साफ छवि होती है और जो सख्त होते हैं। इनकी तैनाती ना तो योगी सरकार ने की ना केंद्र ने की बल्कि चुनाव आयोग की तरफ से हुई और चुनाव आयोग हर अधिकारी का रिपोर्ट कार्ड देखकर ही तैनाती देता है। मगर अफसोस आज की राजनीति में आईपीएस अजयपाल शर्मा को लेकर मुख्यमंत्री बंगाल से लेकर तमाम विपक्षी नेताओं ने हंगामा कर दिया। टीवी पर डिबेट होने लगी। आखिरकार किस और राजनीति जा रही है। अधिकारियों का राजनीतिकरण टीवी पर बैठकर नेतागण कर रहे हैं ये लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। अधिकरियों को जातियों और राजनीतिक दलों में ना बांटा जाए। यदि जिस दिन अधिकारियों का राजनीतिकरण हो गया या उन्हें जाति या धर्म की नजर से देखा जाने लगा तो फिर लोकतंत्र कहा बचेगा। अधिकारियों को अधिकारी ही समझा जाए। अजय पाल शर्मा एक युवा आईपीएस अधिकारी हैं उनके खाते में बहुत उपलब्धियों है इसलिए उन्हें राजनीतिक चश्मे से ना देखा जाए। भाजपा के अलावा अन्य सरकारों में भी तैनात रहे हैं और इसी अंदाज में काम किया है। जय हिंद