नई दिल्ली (युग करवट)। यूरोप में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ब्रिटेन ने दावा किया है कि उसकी समुद्री सीमा के पास रूस की पनडुब्बियां गुप्त गतिविधियां कर रही थीं। इसे सिर्फ जासूसी नहीं, बल्कि संभावित बड़े खतरे के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि ब्रिटिश सेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन गतिविधियों को नाकाम किया और सहयोगी देशों के साथ मिलकर रूसी पनडुब्बियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कई हफ्ते पहले उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में एक रूसी अटैक पनडुब्बी देखी गई थी। इसके बाद ब्रिटिश नौसेना और वायुसेना ने 24 घंटे उसकी निगरानी की। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ ध्यान भटकाने की चाल थी, जबकि दूसरी रूसी यूनिट समुद्र के नीचे अहम ढांचे के पास संदिग्ध गतिविधियां कर रही थी। ब्रिटेन का कहना है कि यह ऑपरेशन केवल जासूसी नहीं था, बल्कि समुद्र के नीचे बिछे महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाने की कोशिश हो सकती थी। खासकर फाइबर ऑप्टिक केबल, जिनसे दुनिया का 99 प्रतिशत डेटा ट्रैफिक चलता है, खतरे में थे। ऐसे में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला माना जा रहा है। ब्रिटिश सेना ने तुरंत अपने युद्धपोत, हेलीकॉप्टर और पनडुब्बी रोधी विमान तैनात किए। रॉयल नेवी के जहाज और विमान लगातार निगरानी करते रहे। समुद्र के अंदर गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए सोनोबॉय तकनीक का इस्तेमाल किया गया और हजारों किलोमीटर तक निगरानी अभियान चलाया गया। इस ऑपरेशन में ब्रिटेन ने अपने सहयोगी देश नॉर्वे के साथ मिलकर काम किया। दोनों देशों की सेनाओं ने मिलकर रूसी यूनिट्स की पहचान की और उन्हें ट्रैक किया। यह भी बताया गया कि रूस की यूनिट समुद्र के नीचे के ढांचे के पास संदिग्ध गतिविधियां कर रही थी। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। वहीं रक्षा मंत्री जॉन हीली ने रूस को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी तरह की छेड़छाड़ के गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने साफ कहा कि ब्रिटेन हर खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है।