नई दिल्ली (युग करवट)। चुनाव राज्य पश्चिम बंगाल इन दिनों नेशनल पॉलिटिक्स में चर्चा का मुद्दा बना हुआ है। सूबे में एसएआई प्रोसेस शुरू होने के बाद से ही सियासी उबाल ज़ोरों पर है। टीएमसी और बीजेपी के बीच तकरीबन टकराव वाली स्थिति है। टीएमसी ने कई बार चुनाव आयोग पर आरोप भी लगाया है। अब एक नया मामला सामने आया है, जिससे विवाद जैसी स्थिति पैदा हो गई है। मामला एसआईआर के दौरान नाम कटने को लेकर शुरू हुआ, जिसके बाद प्रोटेस्ट हुआ। विवाद हुआ और अब इसकी चिंगारी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए निराशा जताई और सूबे की ममता सरकार को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा, पश्चिम बंगाल सबसे ज़्यादा राजनीतिक रूप से बंटा हुआ स्टेट है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी मालदा जिले के एक गांव में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजऩ’ का काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों को घेरे जाने और उन पर हुए दुर्भाग्यपूर्ण हमले के बाद की गई। वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर ज़बरदस्त प्रोटेस्ट हुआ। प्रदर्शनकारियों ने सबसे पहले न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की लेकिन, उनकी यह मांग ठुकरा दी गई। इसके बाद शाम करीब 4 बजे तीन महिला अधिकारियों सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घेर लिया।
इसके बाद, आज भी सुबह से ही मालदा में सडक़ जाम करके एसआईआर के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहा है। फिर से ओल्ड मालदा ब्लॉक के मंगलबाड़ी इलाके में नारायणपुर कैंप के पास नेशनल हाईवे 12 को जाम करके विरोध प्रदर्शन करने के लिए लोग इक_ा हुए। प्रोटेस्ट मालदा के इंग्लिश बाज़ार के जदुपुर इलाके में नेशनल हाईवे 12 पर हुआ। विरोध प्रदर्शन की वजह से हाइवे पर जाम लग गया। इसके बाद, जाम हटाने की कोशिश के दौरान पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं। पुलिस के एक वाहन का ड्राइवर घायल हो गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारी अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने की मांग कर रहे थे। मालदा पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मियों की एक बड़ी टुकड़ी, साथ ही केंद्रीय बलों को भी मौके पर तैनात किया गया है। जाम वाली जगह पर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को जान-बूझकर वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उनके नाम वोटर लिस्ट में वापस शामिल नहीं किए जाते, तब तक यह विरोध प्रदर्शन अनिश्चित काल तक जारी रहेगा। मालदा में घेराव की घटना पर बयान जारी करते हुए तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष ने कहा, हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हम किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का समर्थन नहीं करते। इस घटना के पीछे बीजेपी का हाथ है। उन्होंने कुछ तत्वों को प्रायोजित किया है, जिससे वे अशांति फैलाकर एक मुद्दा खड़ा कर सकें। अब इसकी पूरी ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग की है, क्योंकि अभी कानून-व्यवस्था की कमान उन्हीं के हाथों में है। बयान में आगे कहा गया कि टीएमसी का रुख बिल्कुल साफ है। हम इस मामले को अदालतों में कानूनी तौर पर लड़ रहे हैं। एक कानून-पसंद नागरिक होने के नाते, किसी को भी बीजेपी के जाल में नहीं फंसना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, पश्चिम बंगाल में हुई यह चौंकाने वाली घटना सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को चुनौती देती है, यह सोची-समझी और किसी मकसद से की गई लगती है। सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग से इस घटना की जांच सीबीआई या एनआईए से करवाने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि हम इस जांच पर नजर रखेंगे। कोर्ट ने मुख्य सचिव, पुलिस अधीक्षक और मालदा के जिला कलेक्टर को भी फटकार लगाई।