नई दिल्ली (युग करवट)। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी आरोपी को बिना मुकदमे की सुनवाई शुरू हुए लंबे समय तक जेल में रखना, सजा देने जैसा है। इसी अहम टिप्पणी के साथ अदालत ने पंजाब के एक आरोपी को जमानत दे दी, जो हत्या की कोशिश के मामले में करीब दो साल से जेल में बंद था। अदालत ने माना कि जब ट्रायल शुरू ही नहीं हुआ और जल्द खत्म होने के भी आसार नहीं हैं, तब आरोपी को लगातार जेल में रखना ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि फरवरी 2024 में एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। उस पर हत्या की कोशिश समेत कई आरोप लगाए गए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक इस मामले में अभियोजन पक्ष 23 गवाहों में से एक भी गवाह को अदालत में पेश नहीं कर पाया है। ऐसे में साफ है कि मुकदमे को पूरा होने में अभी काफी समय लगेगा। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति पी. वी. वराले की पीठ ने 13 मार्च के अपने आदेश में कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद लगभग दो साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं हुई है। अदालत ने कहा कि जब किसी व्यक्ति का ट्रायल ही शुरू नहीं हो रहा, तब उसे जेल में बंद रखना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ जाता है। पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि बिना ट्रायल कैद में रखना, सजा देने के बराबर है।