ईरान, इजरायल, अमेरिका युद्घ
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच २८ दिन से चल रहे युद्घ के बीच भारत में अब पिछले एक सप्ताह से गैस को लेकर जो परेशानी चल रही है वो दिन पर दिन बढ़ रही है। हालांकि पेट्रोल अभी मिल रहा है लेकिन कहीं ना कहीं पेट्रोल को लेकर भी नियम बनाये जा रहे हैं। दोपहिया वाहन को 200 रुपए से ज्यादा और कार के लिए दो हजार से ज्यादा पेट्रोल नहीं दिये जाने को लेकर भी कहीं ना कहीं नियम बनाये गये हैं। दरअसल, सबसे ज्यादा घरेलू गैस को लेकर चिंता बनी हुई है। लेकिन इस बीच सरकार के मुखिया की ओर से एक बयान आता है जिसमें कोरोना का जिक्र किया जाता है। बयान में कहा जाता है कि जिस तरह कोरोना के दौरान पूरे देश में एकजुट होकर उसका मुकाबला किया। अब खाड़ी के युद्घ के दौरान भी भारत के लोगों को एकजुटता दिखानी है। सरकार की ओर से लगातार ये दावे किये जा रहे थे कि हमारे यहां ना पेट्रोल की कमी है और ना ही गैस की। लेकिन गैस के लिए लगी लंबी-लंबी लाइनें और बुकिंग ना होना इस बात का संकेत है कि यदि ये युद्घ नहीं रूका तो आने वाले दिन और चिंताजनक हो सकते हैं और ये चिंता तब बढ़ी जब सरकार की ओर से कहा गया कि आने वाले दिन और चिंताजनक है और एकजुटता की जरूरत है। उसके बाद पेट्रोल पंपों पर भी अब लंबी-लंबी लाइनें दिखाई देने लगी है। अब लोगों को लग रहा है कि पेट्रोल की कमी ना हो जाए इसलिए स्टॉक कर लिया जाए। दरअसल, सरकार का काम देशवासियों को, प्रदेशवासियों को भरोसा देना होता है। सरकार की ओर से मिले भरोसे से देशवासियों को सकून मिलता है और एक उन्हें संतुष्टिï भी होती है। अगर सरकार ही कहने लगे कि हालात और चिंताजनक होंगे एकजुटता की जरूरत है तो फिर पैनिक होना स्वाभाविक है। सरकार के इस बयान के बाद से ही विपक्ष भी अब सरकार पर हावी होने लगा है और उसका कहना है कि 2014 के बाद जब से मोदी सरकार आयी है देशवासी लंबी-लंबी लाइनों में लग गये हैं। पहले २०१६ में नोटबंदी होने के बाद लाइनों में लगे लेकिन उसका कोई भी लाभ देश को नहीं मिला ना काला धन आया और ना ही खातों में १५ लाख। फिर कोरोना में भी ताली और थाली खूब बजी और अर्थव्यवस्था बिगड़ गई और अब एक बार फिर देश के लोग गैस लेने के लिए पेट्रोल लेने के लिए लाइनों में लगे हैं। हापुड़ में लाइन में लगे एक व्यक्ति को हार्टअटैक आ गया। ना जाने कितने ऐसे और जगहों पर हादसे भी हो रहे होंगे। सरकार की खामोशी से माहौल और पैनिक होता है और जिस तरह की बयानबाजी होती है उससे आम नागरिक को ये लगता है कि आने वाले दिन और चिंताजनक हो सकते हैं। हालांकि देश के लोगों को प्रधानमंत्री पर पूरा भरोसा है लेकिन जिस तरह २०१४ के बाद प्रधानमंत्री की एक छवि बनी थी विदेशों में उनकी तूती बोलती थी अब उनकी खामोशी पर देश में सवाल उठने लगे हैं। वैसे एक सर्वे में आज भी प्रधानमंत्री दुनिया में सबसे लोकप्रिय नेता घोषित किये गये हैं। लोगों का मानना है कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार ठान लें तो संभवत: युद्घ पर विराम लग सकता है, फिलहाल तो स्थिति चिंताजनक है और लोगों में आगे क्या होगा इसको लेकर पैनिक है सरकार की जिम्मेदारी है कि वो अपने देशवासियों को भरोसा दिलाये कि सबकुछ ठीक किया जाएगा। जय हिंद