चर्चाओं का बाजार गर्म
पिछले दो साल से इस बात की चर्चा चल रही है कि अब योगी मंत्रिमंडल का विस्तार होने वाला है। फलां मंत्री की छुट्टी होगी, नये चेहरे आएंगे, लेकिन ये सब चर्चाएं होती रही और चुनावी साल आ गया। २०२७ में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं लेकिन अभी तक चर्चाएं हकीकत में नहीं बदली। यूपी में पहले के मुकाबले अब भाजपा सरकार को लेकर पूरी तरह से कॉन्फिडेंस दिखाई नहीं दे रहा है। इसी वजह से अब इस बात की चर्चाएं और गरम हो गई है कि अब नवरात्रों के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार ही नहीं होगा बल्कि सामाजिक संतुलन बनाये रखने के लिए तीसरा डिप्टी सीएम भी यूपी में बनाया जा सकता है। तीसरा डिप्टी सीएम बनाने में कोई संवैधानिक अड़चन नहीं है। पहले कर्नाटक में तीन और आंध्र प्रदेश में पांच डिप्टी सीएम बनाये जा चुके हैं। दरअसल, अब यूपी में २०२४ के लोकसभा चुनाव में भाजपा ६२ से ३३ पर आ गई और केंद्र में भी भाजपा को स्पष्टï बहुमत नहीं मिला और वो बैसाखियों पर सरकार चला रही है। जाहिर है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से ही जाता है इसलिए यूपी को मजबूत रहना बहुत जरूरी है। वर्तमान में भाजपा से ब्राह्मïण, जाट और गुर्जर समाज नाराज दिखाई दे रहा है। क्योंकि जितना सम्मान और मंत्रिमंडल में स्थान मिलना चाहिए था इतना स्थान इन तीनों को नहीं मिल पाया वहीं सपा के पीडीए से भी भाजपा हाईकमान परेशान है। पीडीए के बल पर ही सपा ने उत्तर प्रदेश में वो कर दिखाया जिसकी उम्मीद नहीं थी और समाजवादी पार्टी देश में पीडीए के सहारे तीसरे नंबर की पार्टी बन गई। जाहिर है कि अब २०२७ के विधानसभा चुनाव में भाजपा सामाजिक संतुलन बनाये रखने के लिए कुछ भी नया प्रयोग कर सकती है। तीसरी आंख ने देखा कि अभी दो दिन पहले उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के घर संगठन की मीटिंग पहली बार हुई जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बहरहाल, अब तीसरी डिप्टी सीएम के नाम पर बेबी रानी मौर्या जाटव समाज से हैं और महिला भी है उनका नाम प्रमुखता से चल रहा है। वर्तमान में योगी सरकार में मंत्री असीम अरुण का नाम भी चर्चा में हैं। वहीं दिल्ली के खास रहे भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम भी है। इन नामों के पीछे केवल और केवल सामाजिक संतुलन बनाये रखना ही अहम भूमिका दर्शाता है। अब देखना है कि ये सबकुछ चर्चाओं तक सीमित रहेगा या इन्हें अमलीजामा भी पहनाया जाएगा। जय हिंद