तीन नाटो देशों पर ईरान के हमले के बाद
नई दिल्ली (युग करवट)। ईरान और उसके सहयोगी मिलिशिया गुटों ने सीधे तौर पर तीन नाटो सदस्य देशों फ्रांस, इटली और तुर्की के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों ने न केवल क्षेत्रीय तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, बल्कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन के इस युद्ध में सीधे तौर पर कूदने की आशंका भी बढा दी है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां से विश्व युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित सैन्य ठिकानों और तुर्की के एक अहम एयरबेस को मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया। सबसे गंभीर घटना इराक के इरबिल के पास हुई, जहां ईरान समर्थित मिलिशिया के ड्रोन हमले में फ्रांस के एक सैनिक की मौत हो गई। छह अन्य सैनिक घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे सैनिकों पर हमला अस्वीकार्य है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा। इसी दौरान इराक के इरबिल में ही एक अन्य सैन्य ठिकाने को भी निशाना बनाया गया, जहां इटली के सैनिक तैनात हैं।
इस हमले ने इराक में तैनात नाटो देशों की सेनाओं के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। तीसरा हमला तुर्की के प्रसिद्ध इन्किर्लिक एयर बेस पर किया गया।