समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुटकी ली कि बारात का स्वागत सलाद से होगा क्योंकि सिलेंडर ना मिलने से शादी में खाना बनना मुश्किल हो चला है। एक मीम सामने आई जिसमें शादी के एक कार्ड पर लिखा था प्रीतिभोज-सिलेंंडर मिलने पर ही रखा जाएगा। दूसरे कार्ड पर लिखा गया प्रीतिभोज शाम छह बजे से सिलेंडर खत्म होने तक। सरकार और प्रशासन चाहे कितने ही दावे कर ले सच यही है कि रसोई गैस की किल्लत है। लोग कोशिश कर रहे हैं मगर रसोई गैस बुक नहीं हो पा रही है। अब ना तो व्हाट्सअप नंबरों पर, ना टोल फ्री नंबरों पर लोग गैस बुक करा पा रहे हैं। बाजार में कमशर््िेायल सिलेंडर हैं ही नहीं क्योंकि उन पर बैन है। अब ऐसे में उन लोगों के सामने बड़ा संकट पैदा हो गया है जो खाने के लिए बाजार पर निर्भर रहते हैं। खासकर वह ऐसे युवा जो अकेले रहते हैं। क्योंकिअकेले रहने वाले युवा खाने के लिए बाजार पर ही निर्भर हैं। गैस ना मिलने की वजह से अधिकतर दुकानदार वही सामान बेच रहे हैं जो या तो कंपनी से पैक्ड आ रहा है या उसे पकाने के लिए गैस की आवश्यकता नहीं है। मतलब आप भूखे हैं और आपका मन कुछ खाने का है, लेकिन आपको खाना वही पडेगा जो बाजार में दुकानदारों के पास है। आपको वह खाना मिलेगा ही नहीं जिसे खाना आपको पसंद है या जिसे खाने का आपका मन है। यह बात आम आदमी की समझ में नहीं आ रही है कि जब सरकार कह रही है कि रसोई गैस की कोई कमी नहीं है। जिला प्रशासन और गैस एजेंसियां कह रही हैं कि सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में हैं, तो गैस बुक क्यों नहीं हो रही है। गैस एजेंसियों पर सुबह से ही इतनी भीड क्यों लग रही है? लोग आनलाइन भी गैस बुक नहीं कर पा रहे हैं। सबसे बडी मार उस गरीब तबके पर पडी है जिसके पास सिलेंडर तो है मगर अब उसे भरवाने की कोई व्यवस्था नहीं है। झुग्गी झोपडी में रहने वाले लोग कैसे रसोई गैस की व्यवस्था कर पाएंगे? हैरत की बात यह है कि आम आदमी भी जानता है कि गैस की कालाबाजारी हो रही है। प्रशासन चेतावनी भी दे रहा है मगर क्या यह दावा किया जा सकता है कि रसोई गैस की कालाबाजारी नहीं हो रही है? हालात यही रहे तो आने वाले समय में हर भारतीय की रसोई प्रभावित हो जाएगी।