प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सामने सबसे ज्यादा चुनौतियां हैं। चुनौती सत्ता को बचाकर रखने की भी है, पार्टी को संजोने की भी है और भगदड़ रोकने की भी है। पार्टी से जुड़े कई सूत्र बताते हैं कि संगठन ने आंतरिक एवं बाहरी कई एजेंसियों से सर्वे कराए। हर बार के सर्वे में अलग पैमाना रखा गया। विधायकों की लोकप्रियता, उनके काम, जनता के बीच छवि आदि की जांच की गई। एंटी इंकंबेंसी के फैक्टर को भी ध्यान में रखा गया। सब जांचों को एक रिपोर्ट में तैयार करके उनका गहन मंथन किया गया। अब छनकर खबरें आ रही हैं कि पार्टी अपनी अंतिम रिपोर्ट की ओर बढ़ चली है। इस रिपोर्ट के बारे में बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के लगभग सौ विधायकों के टिकट पर खतरा मंडरा रहा है। पार्टी से जुड़े सूत्रों की बात पर विश्वास करें तो पता चलता है कि सौ सीटों पर मौजूदा विधायकों को टिकट ना देकर प्रत्याशी बदले जा सकते हैं। जिन सौ सीटों पर बदलाव की आहट है उनमें पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम तक की सीटें शामिल हैं। साथ ही कुछ ऐसी सीटें भी हैं जिन पर पिछले चुनाव में भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी, उन पर भी प्रत्याशी बदले जाएंगे या फिर ऐसी अधिकतर सीटें सहयोगी दलों को देने पर भी विचार चल रहा है। भाजपा द्वारा सर्वे कराए जाने और रिपोर्ट फाइनल करने की खबर आने के बाद भाजपा के विधायकों में खलबली मची हुई है। मौजूदा विधायकों ने लखनऊ से दिल्ली तक के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं। हर विधायक यही जानना चाहता है कि कहीं टिकट कटने वाली लिस्ट में उसका नाम तो शामिल नहीं हैं। मगर यह भी सच है कि उस लिस्ट के बारे में किसी को कोई भी कुछ बताने को तैयार नहीं है। इतना जरूर बताया जा रहा है कि चुनाव घोषित होने के बाद भाजपा की यह लिस्ट बाहर आएगी, तब तक किसी को भागने का मौका नहीं दिया जाएगा।