बाकी भी होते हैं सिर्फ मॉकड्रिल के लिए संचालित
एक घंटे में ही होती है बड़ी संख्या में बिजली की खपत
गाजियाबाद (युग करवट)। कोविड काल के दौरान कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की अत्याधिक आवश्यकता को देखते हुए जिले में 12 ऑक्सीजन प्लांट बनाए गए थे। जिनमें से वर्तमान में पांच ऑक्सीजन प्लांट खराब पड़े हैं। यहां तक की बाकी प्लांट भी सिर्फ खानापूर्ति के लिए मॉकड्रिल में चलाए जाते हैं ताकि कागजी कार्रवाई पूरी हो सके।
कोविड लहर में लोगों को ऑक्सीजन की कमी न हो, इसलिए जिले में महज एक महीने में ही 12 ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए थे। हालांकि जब तक यह प्लांट पूरी तरह से क्रियाशील होते, तब तक कोविड लहर का असर काफी कम हो गया। इनमें से दो प्लांट जिला अस्पताल, एक महिला अस्पताल, दो संयुक्त जिला अस्पताल, एक भोजपुर, दो लोनी, मुरादनगर, मोदीनगर में बनाए गए थे। ताकि जरूरत पडऩे पर इन ऑक्सीजन प्लांट को इस्तेमाल किया जा सका। वर्ष 2020 में यह प्लांट बनकर तैयार हो गए थे, लेकिन पिछले पांच साल में इन प्लॉटों का उपयोग यदाकदा ही हो पाया है। आलम यह है कि वर्तमान में भी जिले के पांच ऑक्सीजन प्लांट खराब पड़े हैं। जिला संयुक्त अस्पताल का एक प्लांट जो 500 एलएमपी क्षमता का है वह पिछले बीस दिन से खराब है। जिला अस्पताल में बने दोनों ऑक्सीजन प्लांट खराब पड़े हैं। सीएचसी मुरादनगर स्थित 200 एलएमपी और लोनी में लगे 330 एलएमपी के ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़े हैं। सूत्र बताते हैं कि बाकी के भी सात प्लांटों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। यह प्लांट भी सिर्फ तभी चलाए जाते हैं, जब मॉकड्रिल होती है या कोई अधिकार इसकी जांच के लिए पहुंचता है। अन्यथा यह प्लांट पूरी तरह से बंद रहते हैं। बंद रहने के कारण यह प्लांट खराब हो जाते हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि एक प्लांट को अगर एक घंटे भी चलाया जाता है उसमें बिजली की खपत अधिक हो जाती है। जिससे लाभ के बजाए अस्पताल पर वित्तीय भार बढ़ जाता है। इसके कारण अस्पताल प्रशासन इन प्लांटों को चलाता ही नहीं जिसकी वजह से यह प्लांट सिर्फ शोपीस बनकर रह जाते हैं। वहीं नोडल अधिकारी डॉ.आरके गुप्ता ने बताया कि समय-समय पर इन प्लांटों की जांच की जाती रहती है। अगर कोई प्लांट खराब है तो उनकी तत्काल मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाता है। जांच में ही प्लांट के खराब होने का पता चला, तो इन्हें ठीक कराया जा रहा है।
सीएसआर व पीएम केयर फंड से बनाए गए थे यह प्लांट
जिले में 12 ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए थे। यह सभी प्लांट कोविड काल में सीएसआर व पीएम केयर फंड के माध्यम से तैयार किए गए थे। ताकि आम जन को राहत दी जा सके। कोविड की दूसरी लहर में सबसे अधिक आवश्कता ऑक्सीजन की थी, लेकिन जिले में उस समय ऑक्सीजन सिलेण्डर की सीमित मात्रा होने और मांग अधिक होने के कारण इन ऑक्सीजन प्लांट को बनवाया गया था। हालांकि यह प्लांट आज भी सिर्फ शोपीस ही बने हुए हैं।
ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता
जिला संयुक्त अस्पताल में लगे ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता 40 मिनट में 19 सिलेण्डर भरने की है। यानि एक प्लांट यहां 500 एलएमपी क्षमता का है। दूसरा ऑक्सीजन प्लांट यहां 150 एलएमपी है। जिला महिला अस्पताल में लगे ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता 150 एलएमपी है। वहीं जिला अस्पताल में दस हजार लीटर का एलएमओ (लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन) प्लांट बनाया गया था। जिस पर 58 लाख रुपए की लागत आई थी। सीएचसी मुरादनगर में 200 एलएमपी, सीएचसी डासना में 330 एलपीएम, जिला अस्तपाल में दूसरा ऑक्सीजन प्लांट 1000 एलएमपी, पीएचसी भोजपुर में 330 एलएमपी, सीएचसी लोनी में 330 एलएमपी, सीएचसी मोदीनगर में 300 एलएमपी, ईएसआईसी में 150 एलएमपी का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था।
पूर्व में भी हुए थे खराब आक्सीजन प्लांट
जिले में स्थापित किए गए ऑक्सीजन प्लांट कोई पहली बार खराब नहीं हुए हैं। वर्ष 2023 और 2024 में मॉकड्रिल के लिए आई टीम के निरीक्षण में भी यह प्लांट खराब पाए गए थे। इसके बाद इन प्लांटों की देखरेख के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारी तैनात किए गए थे। लेकिन यह व्यवस्था कुछ दिन ही चल सकी, हालात फिर वहीं के वही आ गए।