पश्चिम बंगाल में जीत
पश्चिम बंगाल की जीत वास्तव में भाजपा के लिए एक बड़ी जीत है। ये किसी एक राज्य की जीत नहीं, एक सत्ता के लिए जीत नहीं, अगर सही मायनों में कहा जाए तो ये एक ऐसी जीत है जो सब जीतों पर भारी है। जिस बंगाल के लाल और जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म स्थान बंगाल वहां पर अब आजादी के बाद से आज तक भाजपा जीत नहीं पाई थी। कल की जीत ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को वास्तव में सच्ची श्रद्घांजलि दी है। जनसंघ संस्थापक के गृह प्रदेश में आज तक भगवा नहीं लहराया था। बंगाल की जीत ने वास्तव ने एक इतिहास लिख दिया। जिस तरह उत्तर प्रदेश के अयोध्या से लोकसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार की हार हुई थी भले ही देश में सरकार बन गई हो लेकिन अयोध्या की हार भाजपा के लिए सबक था और भाजपा की हार अयोध्या में जब हुई थी जब अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर बनकर तैयार हो गया था इसलिए अयोध्या की हार को भी भाजपा नहीं भूल पा रही है और वहां से जीते सपा के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद लोकसभा में पहली पंक्ति में बैठकर जरूर अपनी मौजूदगी का अहसास कराते हैं। बार -बार अखिलेश यादव भी अयोध्या के सांसद कहकर और उनको पहली पंक्ति में बैठाकर जिस तरह भाजपा को चिढ़ाते हैं इस हार का भी बदला हालांकि बाद में विधानसभा उपचुनाव में ले लिया। ठीक उसी तरह श्यामा प्रसाद मुखर्जी के गृह प्रदेश में भाजपा कभी नहीं जीत पाई थी ये भी इसकी पीड़ा थी लेकिन बंगाल की जनता ने जिस तरह प्रचंड बहुमत भाजपा को दिया वास्तव में वास्तव में ये श्याम प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्घांजलि है। इसलिए कुछ कामयाबियां सत्ता के लिए नहीं होती बल्कि मान और सम्मान के लिए भी होती है। भाजपा को इस बात का ख्याल रखना होगा कि बंगाल की जनता ने आजादी के बाद पहली बार उस पर भरोसा किया है। जय हिंद