कूटनीति की चाट पकौड़ी
समझ नहीं आ रहा कि हम स्वयं को ‘विश्वगुरु’ किस आधार पर कहते रहते हैं? क्यों इस मामले में मोदी जी और मोहन भागवत जी का आत्मविश्वास इतना है कि जैसे बस अगला संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र हमारे प्रवचन से ही शुरू होगा? क्यों दावे कुछ ऐसे हैं जैसे दुनिया [...]