उल्टी बहती हैं गंगा
गाजियाबाद (युग करवट)। गाजियाबाद, गौतमबुद्घनगर ऐसे जनपद हैं कि यहां पर तैनात हर अफसर की सीधी पहुंच मुख्यमंत्री तक होती है। यही कारण है कि सरकार किसी भी दल की रहती हो यहां पर तैनात हर बड़ा अफसर सीधा पहले पंचम तल और आज लोकभवन से जुड़ा रहता है।
इतना ही नहीं यहां जनप्रतिनिधियों का फीडबैक भी जिले में तैनात अफसरों से लिया जाता है। चाहे सपा की सरकार रही हो, बसपा की सरकार रही हो या आज भाजपा की सरकार रही हो, गाजियाबाद, गौतमबुद्घनगर में जो अफसर तैनात हैं वो सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खास अफसर से सीधे सम्पर्क में रहते हैं। ये अफसर योगी सरकार की आंखों के तारे हैं और मुख्यमंत्री की आंख और कान हैं। यही कारण है कि स्थानीय अफसरों की कोई भी शिकायत अगर जनप्रतिनिधि ऊपर करता है तो उसका खास असर नहीं होता। क्योंकि मुख्यमंत्री की आंख और कान वाले अफसर सही फीडबैक मुख्यमंत्री को दे देते हैं। हालांकि ये अफसर बहुत ही व्यवहारिक और मिलन सार अधिकारी हैं। उनसे कोई भी यूपी का जनप्रतिनिधि नाराज भी नहीं रहता।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गाजियाबाद के कुछ वर्तमान और कुछ पूर्व जनप्रतिनिधियों ने जिले कुछ अधिकारियों की शिकायत लखनऊ की थी लेकिन शिकायत कहां है कुछ पता ही नहीं चला और जिन्होंने शिकायत की थी उनका नाम जरूर लखनऊ वालों ने गाजियाबाद और गौतमबुद्घनगर के अफसरों को बता दिया।
उसका ये असर रहा कि अफसरों ने नेताओं के फोन उठाना और बंद कर दिये। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लखनऊ वाले उल्टे गाजियाबाद और नोएडा के अफसरों से जनप्रतिनिधियों का फीडबैक लेते हैं। नोएडा के जनप्रतिनिधि के बारे में जो फीडबैक दिया गया उसके बाद लखनऊ में उनके नंबर और कम हो गये। हालांकि कुछ जनप्रतिनिधि ऐसे होते हैं जो जरूर लखनऊ के निकट होते हैं और अपने काम करा लेते हैं। लेकिन अधिकतर स्थानीय अफसरों से पंगा नहीं लेते। अगर गाजियाबाद की चर्चा करें तो कविनगर की रामलीला कमेटी को लेकर पूर्व सांसद ने मुख्यमंत्री से लेकर प्रमुख सचिव गृह तक अपनी बात रखी। हालांकि मुख्यमंत्री ने उनकी बात को गंभीरता से सुना क्योंकि पूर्व सांसद का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहुत सम्मान करते हैं और पूर्व सांसद भी मुख्यमंत्री का सम्मान ही नहीं करते बल्कि वो लाइन खींच कर उनके साथ हैं यही कारण है कि मुख्यमंत्री की निकटता के कारण पूर्व सांसद दिल्ली वालों के यहां नहीं जाते वरना उनसे जूनियर लोग बड़े पदों पर आसीन हो गये। बताते हैं कि पूर्व सांसद के कहने पर कमेटी की जांच भी हुई लेकिन अफसरों ने लखनऊ वालों को ऐसा फीडबैक दिया कि फिर कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन ही चलते रहे। हालांकि पूर्व सांसद अभी शांत नहीं बैठे हैं उनका कहना है कि वो जिस मुद्दे को उठाते हैं उसे पूरा जरूर करते हैं और उनका कहना है कि एक बड़ा विकेट जरूर गिरेगा। आचार संहिता के बाद गिरने की संभावना है। बहरहाल, इसमें कोई दोराय नहीं हैं जिलों में तैनात अफसर ऊंची पहुंच के कारण ही सभी को हल्के में लेते हैं। लेकिन कभी-कभी ये हल्कापन भी भारी पड़ जाता है।