स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव चल रहा है। मेरठ खंड स्नातक सीट से भाजपा ने एक बार फिर दिनेश गोयल पर विश्वास जताया है। दिनेश गोयल ने वर्ष २०२० के चुनाव में हेम सिंह पुंडीर को हराकर इतिहास रच दिया था। क्योंकि भाजपा इस चुनाव में पहली बार चुनाव जीती थी। तब हेम सिंह पुंडीर निवर्तमान एमएलसी थे और बीते चार चुनाव लगातार जीते थे, उस समय तक इस चुनाव में उनकी तूती बोलती थी। दिनेश गोयल के सामने इस बार भी परिणाम को दोहराने की चुनौती है। वर्ष २०२० के चुनाव पर नजर डालें तो भाजपा प्रत्याशी दिनेश गोयल को ४३०५२ वोट मिले थे। उनके निकटतम उम्मीदवार हेम सिंह पुंडीर को १५९७२ वोट मिले थे। इस तरह से भाजपा के दिनेश गोयल २७०८० वोटों से चुनाव जीते थे। उस चुनाव में कांग्रेस के जेके गौड़ को ७४७८ और सपा के शमशाद अली को ७०६९ तथा निर्दलीय हरविंद्र को ८९२५ वोट मिले थे। वर्ष २०२० के चुनाव में कुल वोट २.९ लाख थे और १,२३, ९७७ वोट पड़े थे। अबके चुनाव में स्थिति बिलकुल बदली हुई है। कांग्र्रेस ने उम्मीदार उतारा नहीं है। सपा ने प्रमेन्द्र भाटी को प्रत्याशी बनाया है। इसके साथ ही अमित कुमार जैन, दुष्यंत, मोहम्मद अकरम रजा, राहुल कुशवाहा, विक्रांत त्यागी, और विजय कुमार त्यागी निर्दलीय मैदान में हैं। बताया जा रहा है कि इस बार तकरीबन सवा लाख से कुछ अधिक मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे। अगर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को चुनाव जीतना है तो उनको कुल मतदान का कम से कम पचास प्रतिशत वोट चाहिए ही। जोकि बिलकुल भी आसान नहीं है। क्योंकि अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर साठ प्रतिशत भी मतदान हो गया तो 75 हजार के आसपास वोट हो जाएंगे। भाजपा के पास लगभग 50 हजार वोट अपना बताया जा रहा है। पिछले चुनाव का आंकडा देखें तो पुंडीर 15 हजार 972 वोट ले गए थे। इसका मतलब यह है कि भाजपा के वोट कम होने की उम्मीद कम ही है। मगर सपा के वोट इतने बढ़ जाएंगे कि वह चुनाव जीत सके तो यह एक तरह का चमत्कार ही कहा जाएगा। हालांकि चुनाव में कुछ भी संभव है। मगर अभी तो पलड़ा भाजपा का ही भारी लग रहा है।