विधानसभा चुनाव-२०२७, गाजियाबाद विधानसभा सीट
गाजियाबाद (युग करवट)। विधानसभा २०२७ को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। गाजियाबाद में भी चारों तरफ दावेदारों के होर्डिंग्स नजर आने लगे हैं। एक सीट को छोडक़र चारों सीटों पर जबरदस्त दावेदारों के चेहरे सामने आ रहे हैं।
शहर विधानसभा का नंबर 56 विधानसभा है और ऐसे में दावेदार भी 56 इंच के सीने वाले होने चाहिए क्योंकि मौजूदा विधायक संजीव शर्मा ने जिस तरह एक लंबी लाइन खींची है और लोगों के बीच अपना सम्पर्क बनाया है उनको आसानी से कोई साइड कर दे ये बड़ा सवाल है। 56 इंच के सीने वाले दावेदार ही कुछ कर सकते हैं। हालांकि अब तक जो नाम सामने आये हैं उसमें दो ऐसे दावेदार हैं जो 56 इंच का सीना रखते हैं। लेकिन अभी तक ना तो कौर कमेटी की बैठक हुई और ना ही कोई भाजपा हाईकमान की तरफ से कोई संकेत मिला है इसलिए कार्यकर्ता भी असमंजस्य में है और वो खुलकर उनके साथ नहीं आ रहा है। हालांकि एक दावेदार को जरूर दिल्ली से कहा गया है कि वो तैयारी करें। दरअसल, शहर सीट पर वैश्य समाज के उम्मीदवार को उतारे की चर्चा के बाद शहर में वैश्य समाज से संबंध रखने वाले कई दावेदार सक्रिय हो गये लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि संजीव शर्मा को भाजपा हाईकमान साइड लाइन कर देगी। कहीं ना कहीं उन्हें जरूर किसी विधानसभा से टिकट दिया जा सकता है। ये भी सही है कि वैश्य समाज को जरूर इस बार पार्टी टिकट देगी इसलिए वैश्य समाज के लोग सीट पर अपनी दावेदार ठोकने लगे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा में लंबे समय से जुड़े एक ऐसे वैश्य समाज के नेता जो बेबाक माने जाते हैं और जिनका कार्यकर्ताओं में बहुत अच्छा प्रभाव है, स्नेह है, ऐसे वैश्य नेता गोपनीय तरीके से क्षेत्र में मीटिंग कर रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि उनकी मीटिंग में कार्यकर्ता आ रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि वो मीडिया में इसलिए खबरें नहीं दे रहे हैं कि कार्यकर्ताओं का कहना है कि अभी कोर कमेटी की बैठक में भी नाम नहीं आया है इसलिए खुलकर साथ नहीं आ सकते। वहीं एक और दावेदार पूरी मजबूती के साथ अपनी मजबूत रफ्तार के साथ क्षेत्र का भ्रमण कर रहे हैं लोंगों के सम्पर्क में भी हैं लोग उन्हें बुला भी रहे हैं और वो जा भी रहे हैं उनकी रफ्तार में जरूर वैश्य समाज ने इस बात की उम्मीद जगाई है कि इस बार जरूर भाजपा शहर सीट पर वैश्य समाज को मौका देगी। वैसे उपचुनाव में जिस तरह संजीव शर्मा ने जीत दर्ज कराई और उसके बाद वो लगातार जिस तरह लोगों के सम्पर्क हैं, कार्यकर्ताओं के साथ खड़े हैं अभी तक कोई भी ऐसा मुद्दा नहीं आया है जिसमें सदर सीट के लोगों ने मौजूदा विधायक के खिलाफ कोई नाराजगी दिखाई हो या ये कहा हो कि वो मिलते नहीं हैं। वो ब्राह्मïण हैं वैश्य नहीं है इस आधार पर उनका टिकट काटा जाए ये भी कुछ बड़ी वजह नहीं है।
बहरहाल, सदर सीट पर सबसे ज्यादा दावेदार भाजपा में दिखाई दे रहे हंै। अन्य सीट पर दावेदारी तो है लेकिन अभी तक कोई मजबूत चेहरा नहीं आया है। हिंडनपार की एक सीट पर जरूर अंकुर फूट रहे हैं अब वो कितने मजबूती के साथ खड़े होंगे ये देखने वाली बात है। हालांकि उनकी पकड़ बहुत मजबूत है और वो टिकट लेने की हैसियत में हैं।