नई दिल्ली (युग करवट)। यौन उत्पीडऩ मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से एक बार फिर राहत मिली है। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने मेडिकल आधार पर उनकी अंतरिम जमानत 25 मई तक अथवा उनकी अपील पर अंतिम फैसला आने तक बढ़ाने के आदेश दिए हैं। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संगीता शर्मा की खंडपीठ ने सुनाया। आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत और यशपाल सिंह राजपुरोहित ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि आसाराम वर्ष 2013 से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं और वर्ष 2018 में दुष्कर्म मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि बढ़ती उम्र, गंभीर बीमारियों और लंबे समय से चल रहे उपचार के कारण उनकी चिकित्सा लगातार जारी रखना जरूरी है। वर्तमान में आसाराम 29 अक्टूबर 2025 से अंतरिम जमानत पर बाहर रहकर इलाज करा रहे हैं। वकीलों ने अदालत से कहा कि यदि जमानत अवधि नहीं बढ़ाई गई तो उनका उपचार बीच में रुक जाएगा और उन्हें दोबारा जेल में सरेंडर करना पड़ेगा। साथ ही यह भी बताया गया कि सजा के खिलाफ दायर अपील पर 20 अप्रैल को सुनवाई पूरी हो चुकी है और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने अदालत को बताया कि जेल प्रशासन की ओर से समय-समय पर आसाराम को समुचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती रही हैं और उपचार में किसी प्रकार की कमी नहीं रखी गई। खंडपीठ ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय अधिकांश शर्तों को यथावत रखा है।