२०२७ से पहले उठने लगा विरोध
लंबे समय और इंतजार के बाद भाजपा हाईकमान द्वारा जिला व महानगर कमेटी घोषित की गई। पूरे प्रदेश में नगर निगमों, नगर पंचायतों, नगरपालिकाओं में पार्षद नामित किये गये लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर भाजपा हाईकमान के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। दरअसल, पूरे प्रदेश की लिस्ट पर गौर किया जाए तो हत्यारोपी, अपहरण, फिरौती जैसे कई गंभीर अपराधों में शामिल लोगों को मनोनीत किया गया है। पूर्वांचल के कई जिलों में हिस्ट्रीशीटर भी भाजपा के पदाधिकारी बन गये और नामित पार्षद भी। एक ऐसे व्यक्ति को पार्षद नामित किया गया जो छह महीने से जिला बदर था। अब इस लिस्ट को लेकर पूरे प्रदेश में खासकर पूर्वांचल में बड़ा विरोध चल रहा है। दरअसल, पूरे प्रदेश की लिस्ट पर गौर किया जाए तो इसमें अधिकतर वो लोग जो दूसरे दलों से आये हैं। भाजपा का समर्पित कार्यकर्ता आज भी इंतजार में ही है। ऐसे लोगों की संख्या अधिक है जो अपने स्वार्थ के लिए दल बदलते रहते हैं। सवाल ये पैदा होता है कि ऐसे व्यक्तियों को कैसे संगठन ने जिम्मेदारी दे दी। क्या प्रदेश अध्यक्ष, संगठन मंत्री या अन्य लोगों ने कोई समीक्षा नही ं की। सबसे अधिक जो विरोध हो रहा है वो पूर्वांचल में हो रहा है। वैसे तो प्रदेश के हर जिले में कहीं ना कहीं विरोध है और होना भी स्वाभाविक है। क्योंकि लंबे इंतजार के बाद सूची भी आयी तो उसमें भाजपा का समर्पित कार्यकर्ता शामिल नहीं था। ऐसे लोग बना दिये गये हैं जो कल सत्ता बदलते ही दूसरे दलों में खड़े दिखाई देंगे। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में जो विरोध उठा है वो पार्टी के लिए अच्छा संकेत नहीं है। दशकों से भाजपा का झंडा बुलंद करने वाले आज भी अच्छे दिनों के इंतजार में हैं। जय हिंद