आखिरकार क्यों होता है विरोध
राजनीति भी अजीब है हर सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने-अपने तरीके से राजनीति में गोटियां फिट करता है। उसे कोई मतलब नहीं देश से, ना संस्कृति से। केवल और केवल वोट से मतलब होता है। इसके लिए राजनीतिक दल किसी भी हद तक चले जाते हैं। भाजपा के अलावा अन्य दलों के अंदर आरएसएस (संघ) को लेकर बहुत विरोध रहता है। अगर गैरभाजपाई दलों के सामने संघ का जिक्र कर दो तो सबके चेहरे बदल जाते हैं आखिर क्यों विरोध होता है? विरोध के साथ-साथ गैरभाजपाई सरकारें संघ पर पाबंदी लगाने तक की मांग कर देते हैं। जबकि जमीनी हकीकत देखी जाए तो आरएसएस एक राष्टï्र भक्त का निर्माण करता है, इसमें कोई दोराय नहीं है। अभी दो दिन पहले आरएसएस के शताब्दी वर्ष और वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हालांकि कार्यक्रम संघ की तरफ से नहीं था लेकिन कार्यक्रम में अधिकतर संघ के पदाधिकारियों की मौजूदगी रही। उससे जुड़े शिक्षण संस्थानों की भागेदारी रही। इस कार्यक्रम में जो तस्वीर सामने आई उससे ये बात सामने निकलकर आई वास्तव में भारतीय संस्कृति को जिंदा रखने में, हिंदू सस्कृति को कायम बनाये रखने में और राष्टï्र के प्रति समर्पण की भावना पैदा करने में अहम भूमिका संघ निभा रहा है। जो सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये वो संघ द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किये गये। उनकी प्रस्तुति देखकर कार्यक्रम में मौजूद सभी के अंदर एक राष्टï्र भावना और मजबूत हुई। पंडित हरिदत्त शर्मा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में जो भारतीय संस्कृति दिखाई दी आज के दौर में ऐसे कार्यक्रम अब नहीं होते हैं। यही कारण है कि हम भारतीय संस्कृति से ज्यादा पश्चिमी संस्कृति की ओर अग्रसर हो रहे हैं। हम आज की युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति के बारे में जागरूक ही नहीं कर रहे हैं। यदि इस तरह के कार्यक्रम होते रहे तो जो युवा पीढ़ी भटक रही है उसे रोका जा सकता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जिस तरह की वेशभूषा छात्र-छात्राओं की थी उसमें पूरी भारतीय संस्कृति झलक रही थी। आदर और सम्मान भी दिखाई दे रहा था। जाहिर है कि संघ में रहकर अपनी संस्कृति को मजबूत किया जा सकता है। संघ एक ऐसा व्यक्त्वि तैयार करता है जिसके अंदर देश भावना और भारतीय संस्कृति पूरी तरह से होती है और इसका नजारा आयोजित कार्यक्रम में दिखाई दिया। राजनीति से ऊपर उठकर भारतीय संस्कृति को मजबूत करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
जय हिंद