पूर्व सांसद केसी त्यागी ने किया बड़ा खुलासा
गाजियाबाद (युग करवट)। देश की राजनीति में पांच दशकों से सक्रिय रहने वाले पूर्व सांसद केसी त्यागी ने मुलायम सिंह यादव आजम खान के रिश्ते को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने एक चैनल से बातचीत में बताया कि आखिरकार आजम खान को अंतिम सांस तक मुलायम सिंह क्यों मानते रहे थे।
केसी त्यागी ने बताया कि आजम खान अगर मुलायम सिंह को अपना वोट नहीं देते तो मुलायम सिंह की पार्टी नहीं बन पाती। आजम खान के वोट की वजह से ही लोकदल बहुगुणा को मान्यता मिली। उन्होंने बताया कि मान्यता के लिए मात्र एक वोट की आवश्यकता थी और सभी लोग इस बात को लेकर इंतजार कर रहे थे कि आखिरकार कैसे एक वोट मिले और मुलायम सिंह की पार्टी को मान्यता मिले। तब ऐनटाइम पर आजम खान ने लोकदल (अजित) को वोट ना देकर लोकदल (बा) को वोट देकर मुलायम सिंह को राजनीति में जिंदा किया। केसी त्यागी ने अपने लंबे इंटरव्यू में 50 साल में राजनीति और दलों की की स्थिति कैसी रही, कैसे विभाजन हुआ बहुत विस्तार से बताया। केसी त्यागी ने बताया कि एक जमाने में जब हरियाणा में लोकदल ने अपने 90 उम्मीदवार खड़े किये तब सभी की जमानत जब्त हो गई। इतना ही नहीं स्व. चौधरी चरण सिंह की पत्नी गायत्री देवी भी रोहतक से चुनाव हार गई थीं और देवीलाल के नब्बे में से 80 विधायक जीते थे। उन्होंने बताया कि मुलायम सिंह जैसा नेता अब कभी कोई पैदा नहीं हो सकता और उनके अंदर तपस्या संघर्ष और समन्वय जैसे बहुत गुण थे। उन्होंने बताया कि मुलायम सिंह एक बार नहीं कई बार राजनीतिक हाशिये पर चले गये लेकिन वो हार के बाद शांत नहीं बैठते थे।
उन्होंने बताया कि लोकदल का विभाजन हुआ, जनता दल का विभाजन हुआ, कई-कई दलों का विभाजन हुआ लेकिन मुलायम सिंह की एक खास बात थी कि उनके रडार पर जो लोग रहते थे वो उनको परखते भी थे और अपने लोगों का साथ भी देते थे। चंद्रशेखर जी का उन्होंने साथ दिया। वीपी सिंह से उनका मनमुटाव रहा। जब यूपी के मुख्यमंत्री वीपी सिंह थे तब उस समय फूलन देवी, निर्भय गुर्जर और महावीरा जैसे डकैत बड़े सक्रिय थे तब वीपी सिंह एक दस्यु कानून लाये जिसमें डकैतों का साथ देने वालों को भी जेल में डाला गया और उस जमाने में डकैतों का हिमायती होने के कारण मुलायम सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। केसी त्यागी ने बताया कि मुलायम सिंह शुरू से ही बहुत संघर्षशील रहे। वो साइकिल से पढ़ाने जाते थे फिर वापस आकर राजनीति करते थे।
चौ. चरण सिंह ने उन्हें बहुत सम्मान दिया और सबसे पहले चौ. चरण सिंह नेता प्रतिपक्ष थे और मुलायम सिंह उपनेता प्रतिपक्ष बनाये गये यहीं से उनकी यात्रा शुरू हुई। राजनीति में अनुभव कम होने के कारण एवं कद में छोटे होने के कारण शुरू में उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया और रामनरेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया। बाद में रामनरेश यादव अपना चुनाव भी हार गये तब चौधरी चरण सिंह ने कहा था कि मुलायम सिंह को मुख्यमंत्री ना बनाना बड़ी भूल थी। बहरहाल, राजनीति में मुलायम सिंह जैसा राजनेता अब पैदा होने वाला नहीं है।